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साइबर लिटरेसी- AI से बन रहे डीपफेक वीडियो:सावधान! 5 तरीकों से पहचानें फर्जी वीडियो, न करें ये 9 गलतियां, बचाव के 10 टिप्स

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन यह प्राइवेसी के लिए खतरा भी बन रहा है। स्कैमर्स ठगी के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे डीपफेक वीडियो बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ठग डीपफेक यानी AI की मदद से ऐसे नकली फोटो, वीडियो या ऑडियो बना रहे हैं, जो देखने-सुनने में बिल्कुल असली लगते हैं। लोग भी इन्हें असली मान लेते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में सुरक्षित रहने के लिए हर किसी को डीपफेक की पहचान आनी चाहिए। इसलिए ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में आज हम डीपफेक तकनीक को विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- डीपफेक क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- डीपफेक टेक्नोलॉजी और जेनेरेटिव AI कैसे काम करते हैं? जवाब- जेनेरेटिव AI एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक है। यह लाखों फोटो, वीडियो और ऑडियो से पैटर्न सीखकर नया कंटेंट बनाती है। डीपफेक इसी जेनेरेटिव AI पर बेस्ड एक तकनीक है। इसके इस्तेमाल से किसी व्यक्ति का चेहरा, आवाज और हावभाव कॉपी करके नया कंटेंट तैयार किया जाता है, जो देखने-सुनने में असली लगता है। सवाल- क्या ऑडियो भी डीपफेक हो सकता है? जवाब- हां, इसे ‘वॉइस क्लोनिंग’ या ‘डीपफेक ऑडियो’ कहते हैं। सवाल- क्या सिर्फ फोटो से डीपफेक वीडियो बनाया जा सकता है? जवाब- हां, AI टूल्स की मदद से सिर्फ फोटो के आधार पर भी डीपफेक वीडियो बनाया जा सकता है। हालांकि जितने ज्यादा फोटो-वीडियो होते हैं, डीपफेक उतना ही ज्यादा रियल दिखाई देता है। सवाल- डीपफेक के जरिए किस तरह के साइबर फ्रॉड हो सकते हैं? जवाब- ठग इसका इस्तेमाल फर्जी खबरें फैलाने, आइडेंटिटी चुराने, ऑनलाइन ठगी, ब्लैकमेलिंग और लोगों की छवि खराब करने जैसे अपराधों में कर सकते हैं। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए- सवाल- लोग किन गलतियाें से डीपफेक स्कैम का शिकार होते हैं? जवाब- ज्यादातर मामलों में लोग जल्दबाजी, डर, भरोसा या दबाव में आकर डीपफेक स्कैम का शिकार बनते हैं। साइबर ठग इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। ग्राफिक में सभी गलतियां देखिए- सवाल- साइबर ठग किन लोगों को ज्यादा टारगेट करते हैं? जवाब- साइबर ठग आमतौर पर इन लोगों को निशाना बनाते हैं- सवाल- डीपफेक वीडियो कैसे पहचानें? जवाब- डीपफेक वीडियो में मौजूद कुछ असामान्य संकेतों पर ध्यान देकर इसकी पहचान की जा सकती है। सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- सवाल- ‘थ्री फिंगर रूल’ क्या है और यह कैसे काम करता है? जवाब- यह एक रूल है, जिसके जरिए डीपफेक वीडियो कॉल की पहचान की जा सकती है। इसमें वीडियो कॉल पर सामने वाले व्यक्ति से अपने चेहरे के सामने तीन उंगलियां रखने के लिए कहा जाता है। कई बार डीपफेक या फेस-स्वैप सिस्टम ऐसी एक्टिविटी को अचानक सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता। इससे चेहरे पर ग्लिच या विजुअल गड़बड़ी दिखाई दे सकती है। ध्यान रखें- सवाल- डीपफेक स्कैम से कैसे बचें? जवाब- इसका सबसे अच्छा तरीका है कि बिना वेरिफाई किए किसी भी वीडियो/ऑडियो पर भरोसा न करें। ग्राफिक में इस स्कैम से बचने के तरीके देखिए- सवाल- अगर डीपफेक का शिकार हो जाएं तो तुरंत क्या करें? जवाब- ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत ये कदम उठाएं– सवाल- क्या भारत में डीपफेक पर कोई कानून है? जवाब- भारत में फिलहाल डीपफेक के लिए कोई अलग कानून नहीं है। लेकिन डीपफेक के जरिए होने वाले अपराधों पर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 और IT रूल्स, 2021 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। जैसेकि– …………………….. ये खबर भी पढ़ें… साइबर लिटरेसी- लिंक्डइन पर ‘ड्रीम जॉब’ के नाम पर ठगी:तुरंत नौकरी, मोटी सैलरी के झांसे में न आएं, रियल और फेक ऑफर में फर्क समझें आजकल साइबर ठग नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बना रहे हैं। वे लिंक्डइन पर ड्रीम जॉब, वर्क फ्रॉम होम, रिमोट इंटर्नशिप और मोटी सैलरी का लालच देकर ठगी को अंजाम देते हैं। ठग फर्जी रिक्रूटर प्रोफाइल बनाकर बिना इंटरव्यू इंस्टेंट सेलेक्शन का दावा करते हैं और फिर रजिस्ट्रेशन फीस, ट्रेनिंग चार्ज और सेंसिटिव डिटेल्स मांगते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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