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हुरून रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी नंबर-1:अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू ₹38,000 करोड़ बढ़ी, राजीव सिंह की DLF को पीछे छोड़ा

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भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में साल 2026 में बड़ा उलटफेर हुआ है। ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में गौतम अडाणी और उनका परिवार पहली बार नंबर-1 पोजीशन पर पहुंच गया। अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस साल 38,000 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उन्होंने इस मामले में डीएलएफ के राजीव सिंह को पीछे छोड़ दिया है। अडाणी प्रॉपर्टीज बनी सबसे बड़ी वैल्यू क्रिएटर 2026 की ग्रोहे-हुरून इंडिया रियल एस्टेट 150 रिपोर्ट के मुताबिक, अडाणी प्रॉपर्टीज इस साल भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे ज्यादा वैल्यू जोड़ने वाली कंपनी बनकर उभरी है। सालाना आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन 72.5% बढ़कर 90,400 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। अहमदाबाद बेस्ड यह कंपनी चार पायदान की छलांग लगाकर देश की चौथी सबसे वैल्युएबल रियल एस्टेट कंपनी बन गई है। इसके साथ ही यह भारत की सबसे वैल्यूएबल अनलिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर भी बनी हुई है। पहली बार रिच लिस्ट के टॉप पर अडाणी फैमिली वैल्यूएशन में आए इस तेज उछाल के कारण गौतम अडाणी और उनकी फैमिली हुरून इंडिया रियल एस्टेट रिच लिस्ट में पहले नंबर पर आ गई है। अडाणी फैमिली की रियल एस्टेट वेल्थ सालाना आधार पर 73% बढ़कर 90,400 करोड़ रुपए हो गई है। यह रैंकिंग अडाणी प्रॉपर्टीज में इस फैमिली की पूरी 100% ओनरशिप को दर्शाती है। हुरून ने बताया- क्यों आई इतनी बड़ी तेजी हुरून के मुताबिक, अडाणी प्रॉपर्टीज की वैल्यू में इस बड़े उछाल की मुख्य वजह अडाणी ग्रुप का एक स्ट्रैटेजिक फैसला है। ग्रुप ने अपने पूरे रियल एस्टेट ऑपरेशंस को एक करके अडाणी प्रॉपर्टीज के तहत शामिल कर दिया है। रिसर्च फर्म ने नोट किया है कि भारत के सबसे अमीर व्यक्ति इस इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म के जरिए देश का सबसे बड़ा रियल एस्टेट बिजनेस खड़ा कर रहे हैं। DLF भारत की सबसे वैल्यूएबल रियल एस्टेट कंपनी एक तरफ जहां अडाणी प्रॉपर्टीज ने लंबी छलांग लगाई, वहीं दूसरी तरफ लिस्टेड डेवलपर्स के लिए यह साल काफी मुश्किलों भरा रहा। गुरुग्राम बेस्ड डेवलपर DLF की वैल्यूएशन में सालाना आधार पर 29.3% की गिरावट आई और यह घटकर 1.46 लाख करोड़ रुपए रह गई। हालांकि, इस बड़ी गिरावट के बावजूद DLF ने रैंकिंग में अपनी टॉप पोजीशन बरकरार रखी है और यह भारत की सबसे वैल्यूएबल रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है। लोढ़ा डेवलपर्स दूसरे और इंडियन होटल्स तीसरे नंबर पर रैंकिंग में दूसरे नंबर पर लोढ़ा डेवलपर्स है। हालांकि, इसकी वैल्यूएशन में 32.2% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसकी वैल्यू 93,700 करोड़ रुपए रह गई है। वहीं इंडियन होटल्स कंपनी 13.9% की गिरावट के साथ 93,300 करोड़ रुपए की वैल्यूएशन के साथ तीसरे नंबर पर है। ओयो (प्रिज्म) 106.8% की भारी बढ़त के साथ 67,200 करोड़ रुपए की वैल्यू लेकर 5वें नंबर पर आ गई है। रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती के संकेत हुरून की इस रिपोर्ट ने देश के ओवरऑल रियल एस्टेट सेक्टर की सुस्ती को भी उजागर किया है। लिस्ट में शामिल सभी 151 कंपनियों की कुल वैल्यूएशन सिर्फ 2% बढ़कर 16.5 लाख करोड़ रुपए ही हो सकी है। यह पिछले 9 साल (जब से ये रैंकिंग शुरू हुई है) में सबसे धीमी ग्रोथ रेट है। इसके मुकाबले पिछले साल की लिस्ट में 14% की मजबूत ग्रोथ देखी गई थी। रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती की मुख्य वजहें हुरून के मुताबिक, इस सुस्ती के पीछे शेयर बाजार के BSE रियलिटी इंडेक्स में आई 20% की गिरावट है। जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बनी चिंताओं ने निवेशकों के सेंटिमेंट को कमजोर किया है, जिसका सबसे ज्यादा असर रेजिडेंशियल रियल एस्टेट पर पड़ा है। इस साल लिस्ट में शामिल सिर्फ 31 कंपनियों की वैल्यू में बढ़ोतरी हुई, जबकि 74 कंपनियों को गिरावट का सामना करना पड़ा। इस दौरान सभी कंपनियों की कुल वैल्यू सिर्फ ₹34,300 करोड़ रही, जो पिछली बार के ₹1.4 लाख करोड़ के मुकाबले बहुत कम है। गौर करने वाली बात यह है कि इस कुल वैल्यू क्रिएशन का करीब दो-तिहाई (2/3) हिस्सा अकेले अडाणी प्रॉपर्टीज और प्रिज्म (ओयो) ने मिलकर बनाया है, जो दिखाता है कि मुनाफा सिर्फ गिने-चुने प्लेयर्स के पास ही सिमट कर रह गया है। क्या होती है अनलिस्टेड कंपनी? कंपनियां जो शेयर बाजार (BSE/NSE) पर लिस्टेड नहीं होतीं और जिनके शेयर आम लोग नहीं खरीद सकते, उन्हें अनलिस्टेड कंपनी कहते हैं। जैसे- अडाणी प्रॉपर्टीज। क्या होती है एंटरप्राइज वैल्यू? किसी कंपनी की कुल वित्तीय कीमत आंकने का पैमाना, जिसमें कंपनी का मार्केट कैप, कर्ज और उसके पास मौजूद कैश को मिलाकर असल वैल्यू निकाली जाती है। ये खबर भी पढ़ें… खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे: जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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