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फिजिकल हेल्थ- मानसून में बढ़ता निमोनिया का रिस्क:डॉक्टर से जानें इसका कारण और शुरुआती लक्षण, बचाव के लिए जरूरी 11 सावधानियां

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बारिश के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है। इससे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग ज्यादा प्रभावित होते हैं। नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव, घरों में सीलन और हवा में मौजूद फंगस-मोल्ड जैसे कई फैक्टर्स इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ाते हैं। साल 2022 में भारत में हुई मल्टीसेंटर ‘SWORD’ स्टडी के मुताबिक, मानसून के दौरान रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन के मामले बढ़कर करीब 13% तक हो जाते हैं, जबकि गर्मियों में यह आंकड़ा सिर्फ 4% ही रहता है। ‘इंडियन जर्नल ऑफ चेस्ट डिजीज एंड अलाइड साइंस’ में साल 2014 में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, बारिश में भीगकर देर तक गीले रहने से निमोनिया का रिस्क बढ़ सकता है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में मानसून में निमोनिया के रिस्क की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. संदीप कटियार, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर सवाल- निमोनिया क्या है? जवाब- नीचे दिए पॉइंटर्स से समझें- सवाल- क्या मानसून में निमोनिया का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- हां, बारिश में नमी के कारण वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। इसके अलावा घर में सीलन और गंदगी से संक्रमण का रिस्क बढ़ सकता है। ग्राफिक में सभी कारण देखिए- सवाल- किन लोगों में निमोनिया का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में निमोनिया का ज्यादा रिस्क होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- निमोनिया के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं? जवाब- निमोनिया होने पर शुरू में सामान्य सर्दी-खांसी जैसे लक्षण ही दिखते हैं। इसके बाद सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। ग्राफिक में सभी संकेत देखिए- सवाल- मानसून में होने वाली सामान्य सर्दी-खांसी और निमोनिया में फर्क कैसे समझें? जवाब- सामान्य सर्दी में हल्की खांसी और बुखार होता है, जबकि निमोनिया में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कमजोरी ज्यादा होती है। अगर खांसी कई दिनों तक रहे या सांस फूलने लगे तो ये निमोनिया के लक्षण हो सकते हैं। ग्राफिक में दोनों के बीच फर्क देखिए- सवाल- बच्चों में निमोनिया के कौन से संकेत खतरनाक माने जाते हैं? जवाब- बच्चों में निमोनिया के कुछ लक्षण खतरे का संकेत हो सकते हैं। इन्हें समय पर पहचानना जरूरी है। जैसे- इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो बच्चे को तुरंत हॉस्पिटल ले जाएं। सवाल- क्या मानसून में वायरल निमोनिया भी बढ़ता है? जवाब- हां, मानसून के दौरान फ्लू, RSV और सांस से जुड़े वायरस तेजी से फैलते हैं। ये फेफड़ों तक पहुंचकर वायरल निमोनिया की वजह बन सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। सवाल- क्या घर की सीलन और फंगस से भी निमोनिया हो सकता है? जवाब- हां, लेकिन यह जरूरी नहीं है। घर की सीलन और फंगस सांस की एलर्जी और फेफड़ों की समस्या बढ़ा सकती है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इससे फंगल निमोनिया भी हो सकता है। सवाल- क्या AC और बंद कमरों में रहने से रिस्क बढ़ता है? जवाब- सिर्फ AC चलाने से निमोनिया नहीं होता। अगर AC की नियमित सफाई न हो, तो उसमें जमा धूल, फंगस या कुछ बैक्टीरिया भी सांस संबंधी समस्याएं बढ़ा सकते हैं। सवाल- क्या बारिश में भीगने से निमोनिया हो सकता है? जवाब- नहीं, सिर्फ बारिश में भीगने से निमोनिया नहीं होता। निमोनिया बैक्टीरिया, वायरस या फंगस से होने वाला संक्रमण है। हालांकि, भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से रिस्क बढ़ सकता है। सवाल- क्या निमोनिया एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है? जवाब- यह निमोनिया के कारण पर निर्भर करता है। बैक्टीरिया या वायरस से होने वाला निमोनिया खांसने, छींकने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकता है। हालांकि, हर तरह का निमोनिया संक्रामक नहीं होता। सवाल- निमोनिया से बचाव के लिए क्या करें? जवाब- कुछ उपाय अपनाकर निमोनिया के रिस्क से बचा जा सकता है। ग्राफिक में बचाव के सभी टिप्स देखिए- सवाल- क्या वैक्सीन से निमोनिया से बचाव संभव है? जवाब- हां, न्यूमोकोकल और फ्लू वैक्सीन कुछ प्रकार के निमोनिया से बचाव में मददगार होती है। डॉक्टर की सलाह से ये वैक्सीन लगवा सकते हैं। सवाल- क्या निमोनिया होने पर घर पर इलाज करना सही है? जवाब- हल्के मामलों में डॉक्टर की सलाह से घर पर इलाज किया जा सकता है, लेकिन इन कंडीशंस में तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए- सवाल- क्या निमोनिया जानलेवा हो सकता है? जवाब- हां, अगर समय पर इलाज न मिले, तो निमोनिया गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए निमोनिया के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करें। सवाल- कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए? जवाब- निमोनिया के कुछ लक्षण ऐसे होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। जैसे- सवाल- मानसून में फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? जवाब- सभी जरूरी बातें नीचे पॉइंटर्स में देखें- …………………… फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- हर एलर्जी मामूली नहीं: जान भी जा सकती है, डॉक्टर से जानें क्या है एनाफिलैक्सिस, एलर्जी है तो ये इंजेक्शन साथ रखें ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, दुनिया में लगभग 20-30% लोगों को कभी-न-कभी एलर्जी की समस्या होती है। इसमें आमतौर पर छींक, खुजली या आंखों से पानी आने जैसे लक्षण दिखते हैं। लेकिन कुछ लोगों में यही एलर्जी अचानक ‘एनाफिलैक्सिस’ का कारण बन सकती है। पूरी खबर पढ़ें…

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