क्या है हनुमानगढ़ी में इफ्तार और नमाज की कहानी? आइए इसे विस्तार से समझते हैं. क्या वाकई अयोध्या में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी? दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद यह सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गया है. यह मामला उस दौर का है, जब अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद अपने चरम पर था और इसके शांतिपूर्ण समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे थे. वर्ष 2003 में हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञानदास के आश्रम में रोजा-इफ्तार का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम संवाद को बढ़ावा देना और दोनों समुदायों के बीच विश्वास कायम करना था.

