देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में लगातार दो शतक लगाकर भारत के नंबर-3 बल्लेबाज की तलाश को फिलहाल खत्म कर दिया है। उन्होंने गॉल में 167 और कोलंबो में 117 रन की पारियां खेलीं। पडिक्कल ने सीरीज में भारत के लिए सबसे ज्यादा 328 रन बनाए और प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए। इनमें 123 रन स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ आए। 26 साल के पडिक्कल को चोटिल साई सुदर्शन की जगह टीम में मौका मिला था। लेकिन जिस नंबर-3 पोजिशन पर 2023 में चेतेश्वर पुजारा के बाद लगातार बदलाव होते रहे, वहां पडिक्कल ने सिर्फ तीन पारियों में अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। स्टोरी में नंबर-3 पर भारत की परेशानी, पडिक्कल का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड और स्पिन खेलने की खास तकनीक के बारे में… भारत में नंबर-3 की जगह इतनी अहम क्यों? टेस्ट क्रिकेट में नंबर-3 बल्लेबाज को कई बार ओपनर और मिडिल ऑर्डर दोनों की भूमिका निभानी पड़ती है। इसलिए यह टीम की बल्लेबाजी की सबसे अहम पोजिशन में से एक होती है। राहुल द्रविड़ ने भारत के लिए इस जगह पर 10 हजार से ज्यादा रन बनाए। उनके बाद चेतेश्वर पुजारा ने यह जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने 13 साल में नंबर-3 पर 155 पारियां खेलते हुए 6529 रन बनाए। 11 जून 2023 में पुजारा के आखिरी टेस्ट के बाद भारत ने नंबर-3 पर कुल 7 बल्लेबाजों को आजमाया। शुभमन गिल को सबसे पहले यह पोजिशन मिली। उन्होंने इस नंबर पर 972 रन बनाए। उनके टेस्ट मिस करने पर विराट कोहली और केएल राहुल ने भी इस पोजिशन पर बल्लेबाजी की। लेकिन कोहली के रिटायरमेंट के बाद गिल नंबर-4 पर बैटिंग करने लगे। इसके बाद साई सुदर्शन को इंग्लैंड दौरे पर टीम में शामिल किया। हालांकि वे कुछ खास नहीं कर सके। नंबर-3 पर सुदर्शन ने लगभग 32 की औसत से 383 रन बनाए हैं। इंग्लैंड सीरीज में करुण नायर और वॉशिंगटन सुंदर को भी इस नंबर पर मौका मिला। वे भी टीम का भरोसा नहीं जीत सके। ऐसे में देवदत्त पडिक्कल ने सिर्फ 5 पारियों में 353 रन बनाकर अपने आपको रेस में सबसे आगे कर दिया है। श्रीलंका में मौका कैसे मिला? साई सुदर्शन चोट के कारण श्रीलंका दौरे से बाहर हो गए। इससे नंबर-3 की जगह पडिक्कल के लिए खुली। इससे पहले वे भारत A के लिए दो अर्धशतक लगा चुके थे और श्रीलंका में ही टूर गेम में 142 रन की नाबाद पारी खेल चुके थे। पडिक्कल ने 2025-26 के घरेलू फर्स्ट-क्लास सीजन में 812 रन 47.76 के औसत से बनाए। इसमें ऑस्ट्रेलिया A के खिलाफ 150 और रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में 232 रन की पारियां शामिल थीं। उन्होंने कर्नाटक की कप्तानी करते हुए टीम को फाइनल तक भी पहुंचाया। पडिक्कल ने 109.33 की औसत से रन बनाए पडिक्कल ने पहले टेस्ट की पहली पारी में 167 रन बनाए और दूसरी पारी में 44 रन जोड़े। दूसरे टेस्ट में उन्होंने 117 रन की पारी खेली। इस तरह सीरीज में उनके नाम 328 रन रहे। उन्होंने 109.33 की औसत से बल्लेबाजी की। उनके दोनों शतक लगातार टेस्ट मैचों में आए। यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह उनकी पहली सीरीज रही, जहां उन्होंने सभी मैच खेले। इससे पहले उन्हें 2024 में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ एक-एक टेस्ट खेलने का मौका मिला था। पडिक्कल का स्पिन के खिलाफ बैकफुट गेम मजबूत भारत के बल्लेबाजों की स्पिन के खिलाफ खेलने की मजबूत पहचान रही है, लेकिन हाल के दौर में टीम इसी कमजोरी से परेशान रही। न्यूजीलैंड के स्पिनर्स ने तीन टेस्ट में 37 विकेट लिए और उनका औसत 23.48 रहा। इसके बाद साउथ अफ्रीकी स्पिनर्स ने भारत में दो टेस्ट में 25 विकेट लिए और 15.48 के औसत से गेंदबाजी की। यह भारत में किसी विदेशी टीम के स्पिनर्स का टेस्ट इतिहास में सबसे बेहतर औसत था। इसी दौर में देवदत्त पडिक्कल ने स्पिन के खिलाफ अलग तरीका अपनाया। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज में स्पिनर्स की लेंथ गेंदों पर उन्होंने 37.4% गेंदें बैकफुट से खेलीं। कोलंबो टेस्ट में 117 रन की पारी के दौरान भी पडिक्कल ने स्पिन के खिलाफ बैकफुट से 52 रन बनाए, जिनमें 47 रन लेंथ गेंदों पर आए। श्रीलंका सीरीज में स्पिन के खिलाफ उनका स्ट्राइक रेट करीब 65 रहा। पडिक्कल की 6 फीट 3 इंच की लंबाई भी उनके इस अंदाज में मदद करती है। वे अच्छी लेंथ की गेंदों पर भी पीछे जाकर कट, पंच और पुल जैसे शॉट खेलते हैं। आमतौर पर भारतीय बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ फ्रंटफुट पर जाकर खेलते हैं, जबकि पडिक्कल का तरीका अलग है। पडिक्कल और साई सुदर्शन में क्या अंतर? दोनों बल्लेबाज स्पिनर्स की लेंथ गेंदों के खिलाफ बैकफुट पर खेलने का तरीका अपनाते हैं। साई सुदर्शन ने ऐसी गेंदों पर करीब 36.5% बार बैकफुट का इस्तेमाल किया, जो पडिक्कल के 37.4% के लगभग बराबर है। फर्क इन शॉट्स से रन बनाने में नजर आता है। पडिक्कल बैकफुट शॉट्स पर करीब 50 के स्ट्राइक रेट से रन बनाते हैं, जबकि साई सुदर्शन का स्ट्राइक रेट इन शॉट्स पर सिंगल डिजिट में रहा है। घरेलू क्रिकेट में पडिक्कल का रिकॉर्ड कितना मजबूत है? पडिक्कल ने जूनियर स्टेज से ही घरेलू क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया। 2018 की कूच बिहार ट्रॉफी में उन्होंने 829 रन बनाए और टूर्नामेंट के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। इसके बाद उन्हें कर्नाटक की सीनियर टीम में जगह मिली। 2019-20 विजय हजारे ट्रॉफी में पडिक्कल ने 609 रन बनाए और टूर्नामेंट के टॉप रन-स्कोरर रहे। इसी दौरान उन्होंने अपना पहला लिस्ट-A शतक भी लगाया। 2025-26 फर्स्ट-क्लास सीजन में 812 रन बनाने के प्रदर्शन ने भी उनके टेस्ट दावे को मजबूत किया। IPL और इंटरनेशनल करियर कैसा रहा? पडिक्कल ने 2020 में RCB के लिए IPL डेब्यू किया। उन्होंने शुरुआती चार मैचों में तीन अर्धशतक लगाए और पूरे सीजन में 473 रन बनाए। उन्हें इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर भी चुना गया। 2021 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ नाबाद 101 रन बनाकर उन्होंने अपना पहला IPL शतक लगाया। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स के लिए दो सीजन में पडिक्कल ने 28 मैचों में 637 रन बनाए, जबकि 2024 में लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए उनका औसत सिर्फ 5.43 रहा। हालांकि, 2025 और 2026 में RCB की खिताबी टीम का हिस्सा रहते हुए उन्होंने टीम को लगातार दो IPL ट्रॉफी जीतने में योगदान दिया। 2025 में उन्होंने 10 मैचों में 247 रन बनाए, जबकि 2026 में 16 मैचों में 464 रन बनाए। टेस्ट क्रिकेट में पडिक्कल ने 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू किया। पहली ही पारी में उन्होंने 65 रन बनाए। 2024-25 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हालांकि उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा और वे दोनों पारियों में 0 और 25 रन ही बना सके। द्रविड़ और पुजारा पडिक्कल के बारे में क्या कहते हैं? पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने श्रीलंका के खिलाफ गॉल टेस्ट में पडिक्कल की 167 रन की पारी की तारीफ की। उन्होंने कहा कि चोटिल साई सुदर्शन की जगह टीम में आए पडिक्कल ने मिले मौके का शानदार फायदा उठाया और नंबर-3 पर अपनी पहली बड़ी पारी खेली। पडिक्कल ने द्रविड़ की तरह ही नंबर-3 पर प्रभावी शुरुआत की है। कर्नाटक क्रिकेट में भी द्रविड़ उनके लिए मददगार रहे हैं। पडिक्कल के मुताबिक, द्रविड़ कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (KSCA) में उनसे मिलने और जरूरी सलाह देने के लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। वहीं, पूर्व नंबर-3 बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना है कि पडिक्कल को इस पोजिशन पर लगातार कुछ समय तक मौका मिलना चाहिए। उनके मुताबिक घरेलू क्रिकेट और IPL में प्रदर्शन के दम पर पडिक्कल इस अवसर के लिए तैयार थे और उन्होंने अपनी तकनीक पर भी काम किया है।

