इस सोमवार को सुबह 7:30 बजे मेरे एक स्कूलमेट का फोन आया। चूंकि मैं अपना कॉलम लिखने में व्यस्त था तो मैंने फोन स्पीकर पर रखकर कहा, ‘बोल।’ तभी घबराई हुई महिला की आवाज सुनकर मैंने फोन कान से लगा लिया। उनकी पत्नी बोलीं, ‘भाई साहब, क्या आप जल्दी से घर आ सकते हैं? इन्हें […]
हम दूसरे देशों से अपेक्षा करते हैं कि वे भारतीयों का स्वागत करें, उन्हें स्थायी आवास और अंततः नागरिकता भी प्रदान करें। लेकिन हम शायद ही कभी सवाल उठाते हैं कि क्या भारत के अपने नागरिकता कानूनों में भी वैसा ही खुलापन है? आप्रवासियों के अधिकारों पर हमारी चिंता अकसर हमारी ही सीमाओं पर आकर […]
आजादी के बाद से भारत के विरुद्ध कोई अलगाववादी आंदोलन सफल नहीं हुआ है। इसका श्रेय लोकतंत्र द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरणों के साथ ही जरूरी परिस्थितियों में राज्य की दृढ़ प्रतिक्रिया को भी जाता है। फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर उपजे विवाद को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। क्या कलात्मक स्वतंत्रता में यह अधिकार […]