हाल ही में मैंने अपने एक कॉलम में लिखा था कि लोकसभा में अल्पमत में होने के बावजूद भाजपा देश को एकदलीय व्यवस्था की ओर ले जा रही है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। यह दूसरे दल के उभार की संभावना का रास्ता भी बना सकता है, बशर्ते यह दल उन क्षेत्रीय दलों का […]
देश ने पहले मंदिरों पर आक्रमण देखे। फिर प्रतिमाओं को टूटते देखा। फिर हमने एकजुट होकर मंदिरों की रक्षा की, प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की। हमने मंदिर इसलिए बनाए थे कि वे हमारे संकट दूर करेंगे। धीरे-धीरे मंदिर खुद ही संकट में आ गए। मंदिर की मूर्ति, भवन तो अब सुरक्षित है पर दानपेटियों को सुरक्षित […]
जब भी मैं मेहमानों को मुंबई के अंधेरी-कुर्ला रोड लेकर जाता हूं तो बताता हूं कि 1940 से 1980 के दशक तक यह इलाका बॉम्बे (अब मुंबई) के सबसे व्यस्त फिल्म निर्माण केंद्रों में से एक हुआ करता था। मोहन स्टूडियो में मुगल-ए-आजम, देवदास और बंदिनी जैसी महान फिल्में शूट हुई थीं। मुगल-ए-आजम के लिए […]