热门话题

55 साल में कितना बदला वनडे क्रिकेट:कलर जर्सी, डे-नाइट मैच और सुपर ओवर जैसे नियम बदले; क्या होगा 50 ओवर फॉर्मट का फ्यूचर

Socialblize是您值得信赖的目的地,提供来自印度和世界各地的最新新闻、热门故事和富有洞察力的更新。我们致力于提供快速、准确和公正的新闻,让您每天都能及时了解情况。

वनडे क्रिकेट का 5000वां मैच शुक्रवार को स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला गया। इसे स्कॉटलैंड ने जीता। 5 जनवरी 1971 को बारिश से धुले एक टेस्ट मैच की भरपाई के लिए शुरू हुआ वनडे फॉर्मेट आज मैचों की संख्या के लिहाज से क्रिकेट का सबसे बड़ा फॉर्मेट बन चुका है। इन 55 सालों में क्रिकेट के सबसे ज्यादा प्रयोग भी इसी फॉर्मेट में हुए। तीसरे अंपायर से लेकर डे-नाइट क्रिकेट, सफेद गेंद, पावरप्ले, DRS, DLS और सुपर ओवर तक लगभग हर बड़ा बदलाव सबसे पहले वनडे में ही लागू हुआ। 5 चैप्टर वनडे क्रिकेट के बदलने की कहानी… रद्द टेस्ट मैच से हुई थी वनडे की शुरुआत पहला वनडे 5 जनवरी 1971 को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था। इंग्लैंड दौरे का तीसरा टेस्ट लगातार चार दिन बारिश में धुल गया था। दर्शकों को खाली हाथ लौटने से बचाने के लिए आखिरी दिन 40-40 ओवर का एक सीमित ओवर मैच कराया गया। उस समय खिलाड़ियों ने सफेद कपड़े पहने थे और लाल गेंद से मैच खेला गया। तब किसी ने नहीं सोचा था कि यही क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय फॉर्मेट्स में से एक की शुरुआत होगी। 25 साल तक वनडे का कोई तय फॉर्मेट ही नहीं था आज 50 ओवर का वनडे सामान्य बात है, लेकिन शुरुआत में ऐसा नहीं था। पहला वनडे 40-40 ओवर का था और उसमें 8 गेंद का ओवर होता था। इंग्लैंड 55 ओवर के मैच कराता था, जबकि 1975 और 1979 के पहले दो वर्ल्ड कप 60 ओवर के हुए। न्यूजीलैंड में 35 ओवर, वेस्टइंडीज में 45 ओवर और पाकिस्तान में अलग-अलग समय पर 35, 40 और 50 ओवर के मुकाबले खेले गए। शुरुआती दौर में हर देश अपनी सुविधा और दिन के उजाले के हिसाब से ओवर तय करता था। बाद में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में समानता लाने के लिए 50 ओवर का फॉर्मेट अपनाया गया। 1978 में वेस्टइंडीज पहला देश बना जिसने 50 ओवर के वनडे कराए। फिर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने इसे अपनाया। 1987 का वर्ल्ड कप पहली बार 50 ओवर का हुआ, लेकिन तब भी इंग्लैंड 55 ओवर के वनडे खेलता रहा। आखिरकार 1996 वर्ल्ड कप के बाद पूरी दुनिया में 50 ओवर का फॉर्मेट लागू हो गया। केरी पैकर विवाद ने क्रिकेट की तस्वीर बदल दी 1977 में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कारोबारी केरी पैकर ने वर्ल्ड सीरीज क्रिकेट (WSC) शुरू की। उन्होंने दुनिया के बड़े खिलाड़ियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लेकर अलग टूर्नामेंट कराया। इसमें सभी बड़े खिलाड़ियों ने पेस्टल रंगों की जर्सी पहनी। इस सीरीज के बाद क्रिकेट में तीन बदलाव आए। एक कप्तान ने 10 फील्डर बाउंड्री पर लगा दिए, फिर आया पावरप्ले वनडे में फील्डिंग नियम भी एक घटना के बाद बदले। 1979 में इंग्लैंड के कप्तान माइक ब्रियरली ने आखिरी गेंद पर विकेटकीपर समेत सभी 10 फील्डर बाउंड्री पर लगा दिए। बल्लेबाज के लिए चौका या छक्का लगाना लगभग असंभव हो गया। इसके बाद फील्डिंग रिस्ट्रिक्शन लाया गया। 1992 वर्ल्ड कप में इन्हें पहली बार माना गया। 2005 में पावरप्ले आया। 2008, 2011 और 2012 में इसके नियम बदले गए। 2015 से मौजूदा फील्डिंग नियम लागू हैं। बारिश के नियम सबसे ज्यादा बदले वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा प्रयोग बारिश से प्रभावित मैचों के नियमों में हुए। शुरुआत में हर देश अपने हिसाब से नियम बनाता था। कहीं रनरेट से नतीजा निकलता था तो कहीं पहले 45 ओवर के स्कोर से फैसला होता था। 1991 के शारजाह कप में खराब रोशनी के दौरान ऐसी स्थिति बन गई कि खिलाड़ियों, कप्तानों और अंपायरों तक को नहीं पता था कि मैच का नतीजा कैसे निकलेगा। इसके बाद ICC ने सभी देशों के लिए एक समान नियम बनाने की प्रक्रिया शुरू की। 1992 में नए नियम लागू किए गए, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुए। आखिरकार 1997 में पहली बार डकवर्थ-लुईस (DL) नियम लागू हुआ। 1999 में ICC ने इसे आधिकारिक रूप से अपनाया। बाद में स्टीवन स्टर्न के बदलावों के बाद यही DLS सिस्टम बन गया, जो आज भी इस्तेमाल होता है। सुपर सब आया, लेकिन एक साल भी नहीं चला आज IPL का इम्पैक्ट प्लेयर नियम चर्चा में रहता है, लेकिन इसका पहला रूप वनडे में 2005 में देखने को मिला था। तब ‘सुपर सब’ नियम लागू किया गया, जिसमें टीम पहले से एक अतिरिक्त खिलाड़ी को चुनती थी और मैच के दौरान उसे उतार सकती थी। इंग्लैंड के विक्रम सोलंकी पहले सुपर सब बने, लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं रहा और एक साल के भीतर ही इसे खत्म करना पड़ा। टाई मैच का फैसला भी कई बार बदला शुरुआती दौर में टाई मैच का फैसला विकेटों की संख्या या लीग स्टेज के प्रदर्शन के आधार पर होता था। 2011 वर्ल्ड कप से नॉकआउट मुकाबलों में सुपर ओवर लागू किया गया। 2019 वर्ल्ड कप फाइनल में बाउंड्री काउंट नियम की दुनिया भर में आलोचना हुई। इसके बाद ICC ने नियम बदल दिया और 2023 से हर टाई वनडे का फैसला सुपर ओवर से होना अनिवार्य कर दिया। सफेद गेंद ने खत्म की रिवर्स स्विंग, फिर बदला नियम 2001 तक लाल गेंद पूरी तरह वनडे से बाहर हो गई। लेकिन सफेद गेंद जल्दी गंदी होने लगी, इसलिए ICC ने एक पारी में दो नई गेंदों का नियम लागू किया। इससे गेंद ज्यादा देर नई रही और रिवर्स स्विंग लगभग खत्म हो गई। इसके बाद गेंदबाजों की शिकायतों को देखते हुए 2025 में नियम बदला गया। अब 34 ओवर के बाद गेंदबाजी टीम दोनों में से किसी एक पुरानी गेंद से बाकी ओवर करा सकती है, जिससे रिवर्स स्विंग की संभावना बढ़ जाती है। 55 साल में बल्लेबाजी पूरी तरह बदल गई वनडे के शुरुआती 1000 मैचों में पहली पारी का औसत स्कोर 213.9 रन था। पिछले 1000 मैचों में यह बढ़कर 249.97 रन हो गया। पहले 3000 मैचों में केवल 360 बार टीमें 300 रन के पार पहुंची थीं, जबकि पिछले 1000 मैचों में ही 321 बार 300+ स्कोर बने। इनमें 86 बार स्कोर 350 रन से भी ज्यादा रहा। अब टीमें लक्ष्य का पीछा करते हुए भी 300 रन आसानी से बना रही हैं। बैटिंग औसत 26.39 से बढ़कर 29.03 हो गया है, जबकि स्ट्राइक रेट 66.15 से बढ़कर 83.4 पहुंच गया। पहले जहां हर 127 गेंद पर एक छक्का लगता था, अब हर 55.42 गेंद पर छक्का लग रहा है। गेंदबाज भी पहले से ज्यादा विकेट ले रहे हैं और पांच विकेट लेने की घटनाएं भी लगभग दोगुनी हो गई हैं। टी-20 ने वनडे को चुनौती दी, लेकिन खत्म नहीं कर पाया 2007 में टी-20 वर्ल्ड कप और उसके बाद दुनिया भर में शुरू हुई फ्रेंचाइजी लीगों के कारण द्विपक्षीय वनडे सीरीज कम हो गई हैं। इसके बावजूद वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट इस फॉर्मेट को पॉपुलर बनाए हुए हैं। ———————————————————-

标签 :

留下回复

您的电子邮件地址不会被公开。 必填字段标有 *

最新消息

关于我们

Socialblize是您值得信赖的目的地,提供来自印度和世界各地的最新新闻、热门故事和富有洞察力的更新。我们致力于提供快速、准确和公正的新闻,让您每天都能及时了解情况。

联系我们: info@socialblize.com

联系方式: +91-7976784661

Socialblize @2026. 版权所有。