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रिलेशनशिप एडवाइज- मेरे दोनों बॉयफ्रेंड्स टॉक्सिक थे:मैं ऐसे लोगों की तरफ ही क्यों अट्रैक्ट होती हूं, मुझे सच्चा प्यार कैसे मिलेगा

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सवाल- मेरी उम्र 28 साल है। मैं अब तक 2 रिलेशनशिप्स में रही हूं, लेकिन दोनों रिलेशनशिप बहुत टॉक्सिक थे। पार्टनर्स इमोशनली एब्सेंट थे। मैं रिश्ते को बनाए रखने के लिए एकतरफा कोशिश करती थी। फिर फाइनली जब बर्दाश्त के बाहर हो गया, तो मैंने ब्रेकअप कर लिया। एक के बाद एक दो बुरे अनुभवों के बाद अब मुझे रिश्तों से ही डर लगने लगा है। मेरी फ्रेंड कहती है कि मैं टॉक्सिक लोगों के प्रति अट्रैक्ट होती हूं। मुझे थेरेपी लेनी चाहिए। क्या ये सच है? क्या ये सच है कि मुझे टॉक्सिक लोग ही पसंद आते हैं। मैं एक हेल्दी, हैप्पी रिश्ता चाहती हूं। मैं क्या करूं? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- सवाल पूछने के लिए आपका शुक्रिया। सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि इसमें आपकी कोई गलती नहीं है। साइकोलॉजी के मुताबिक, अगर कोई जिंदगी में बार-बार एक जैसा पैटर्न रिपीट कर रहा है तो इसके पीछे की असली वजह पहचानने की जरूरत है। चलिए आपकी प्रॉब्लम समझते हैं और सॉल्यूशन पर बात करते हैं। बार-बार टॉक्सिक पार्टनर चुनने का क्या मतलब है? अगर कोई एक ही पैटर्न के लूप में फंसा हुआ है तो इसे साइकोलॉजी में ‘रिपिटिशन कंपल्शन’ कहते हैं। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- इन तीनों वजहों को विस्तार से समझते हैं- आपका अटैचमेंट स्टाइल क्या है? बचपन के अनुभव या पेरेंट्स के साथ हमारा रिश्ता तय करता है कि हम बड़े होकर प्यार और रिश्तों को कैसे देखेंगे। इसे ‘अटैचमेंट स्टाइल’ कहा जाता है, जो मुख्य रूप से दो तरह का होता है- सेफ अटैचमेंट- जिन बच्चों का अपने पेरेंट्स के साथ सुरक्षित और भरोसेमंद रिश्ता होता है, वे खुलकर मुस्कुराते हैं, खेलते हैं और खुश रहते हैं। वे अंदर से पूरी तरह सुरक्षित महसूस करते हैं। बड़े होकर ऐसे लोग रिश्तों में मजबूत बाउंड्रीज तय कर पाते हैं। अनसेफ अटैचमेंट- अगर बचपन में किसी भी कारण से बच्चे के मन में एक अनजाना डर या असुरक्षा घर कर जाए, तो वह बड़ा होकर ‘इनसिक्योर’ बना रहता है। उसका ब्रेन इनसिक्योरटी को नॉर्मलाइज करता है। ऐसे में मुमकिन है कि टॉक्सिक लोगों के आसपास रहते हुए उसे इस बात का एहसास न हो कि ये उसके लिए ठीक नहीं है क्योंकि उसने बचपन से यही देखा है। क्या आप पीपल प्लीजर हैं? आपने बताया कि आप रिश्ते को बचाने के लिए हमेशा ‘एकतरफा कोशिश’ करती थीं। साइकोलॉजी में इसे ‘पीपल प्लीजिंग’ कहते हैं। ‘पीपल प्लीजिंग’ में व्यक्ति को लगता है कि वह अपनी कोशिश और प्यार से सामने वाले को बदल देगा या टूटे रिश्ते को ठीक कर देगा। यह भी एक तरह का अनसेफ अटैचमेंट ही है। इसे एक उदाहरण से समझें- मान लीजिए आपकी ऑफिस की टीम में कोई ऐसा इंसान है, जो कोई काम नहीं करता और सारा बोझ किसी सीधे व्यक्ति पर डाल देता है और सीधा व्यक्ति चुपचाप काम करता रहता है। एक सेफ व्यक्ति तुरंत बाउंड्री लाइन खींचेगा कि ‘तुम्हारा काम मैं क्यों करूं? अपना काम खुद करो।’ लेकिन एक अनसेफ व्यक्ति अपनी तकलीफ नहीं बता पाता है। आपके घर का माहौल कैसा था? अगर हमारे बचपन में इमोशनल इनसिक्योरिटी रही हो, तो बड़े होकर भी हम ऐसे लोगों की तरफ आकर्षित होते हैं, जो इमोशनली एब्सेंट होते हैं। क्योंकि हमारा सबकॉन्शस माइंड इसी माहौल को नॉर्मल समझने लगता है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है, ग्राफिक की मदद से समझिए- क्या आपको ‘थेरेपी’ लेनी चाहिए? हां, आपको थेरेपी बिल्कुल लेनी चाहिए। आपकी फ्रेंड की यह सलाह 100% सही है। लेकिन थेरेपी इसलिए नहीं लेनी है कि आपमें कोई कमी या खराबी है या आपको जानबूझकर टॉक्सिक लोग पसंद हैं। थेरेपी की जरूरत इसलिए है क्योंकि इससे आपको जीवन के प्रति विस्तृत नजरिया मिलेगा। थेरेपी आपको इन चीजों में मदद करेगी- थेरेपी कैसे मदद करती है, समझने के लिए ग्राफिक देखिए- हेल्दी और अनहेल्दी रिलेशनशिप में क्या फर्क है? लंबे समय तक टॉक्सिक माहौल में रहने के कारण कई बार हमारा सबकॉन्शस माइंड दर्द और असुरक्षा को ही ‘नॉर्मल प्यार’ समझने लगता है। लेकिन एक सेफ और अनसेफ रिश्ते में बहुत फर्क होता है। हेल्दी रिलेशनशिप आपको सुकून और आगे बढ़ने का हौसला देता है, जबकि अनहेल्दी रिश्ता आपकी सेल्फ-वर्थ और मानसिक शांति छीन लेता है। नीचे ग्राफिक में दोनों के बुनियादी अंतर समझिए- हेल्दी रिश्ता कैसे बनाएं? अगर आप भविष्य में एक सुरक्षित और खुशहाल रिश्ता चाहती हैं, तो इन 4 प्रैक्टिकल स्टेप्स से शुरुआत करें- 1. रिश्तों से थोड़ा ब्रेक लें- अभी तुरंत किसी नए रिश्ते में जाने की जल्दी न करें। डर की इस भावना को स्वीकार करें। इस समय का उपयोग खुद को हील करने और यह समझने में करें कि आपको रिश्ते से क्या चाहिए। 2. अपने साथ रिलेशनशिप बनाएं- जब आप खुद के साथ एक ‘सेफ अटैचमेंट’ बना लेंगी, अपनी खुशियों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना बंद कर देंगी, तब आप एक हेल्दी रिश्ते के लिए तैयार होंगी। अब आप खुद से ये सवाल पूछकर तय करिए कि इन पैरामीटर्स पर आपका खुद से रिश्ता कैसा है? 3. ‘ना’ कहने की आदत डालें- शुरुआत से ही अपनी पसंद-नापसंद को लेकर स्पष्ट रहें। अगर कोई व्यक्ति शुरुआत में ही आपकी कॉल या मैसेज को लगातार इग्नोर करता है या इमोशनली उपलब्ध नहीं दिखता, तो उसे बदलने की कोशिश न करें, वहीं रुक जाएं। 4. थेरेपी लें- एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के साथ सेशन करने से आपको अपने अंतर्मन के उन सभी ब्लॉकेज को हटाने में मदद मिलेगी, जो आपको अनजाने में गलत लोगों की तरफ ले जाते हैं। अंतिम बात बार-बार टॉक्सिक पार्टनर चुनना आपकी कमी नहीं, बल्कि सबकॉन्शस माइंड का एक पुराना पैटर्न है। खुद को बेबस बच्चा समझने के बजाय अब अपनी लाइफ की जिम्मेदारी लें। हीलिंग के लिए थोड़ा ब्रेक लें, थेरेपी की मदद से बाउंड्रीज सेट करना सीखें और खुद के साथ एक मजबूत, सुरक्षित रिश्ता बनाएं। ………………
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