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मेंटल हेल्थ- शादी के बाद नौकरी छोड़ दी:अब सिर्फ एक पत्नी और मां हूं, सबको खुश करने की कोशिश में अपनी खुशी भूल गई, क्या करूं?

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सवाल– मैं 34 साल की महिला हूं। शादी के बाद मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी थी क्योंकि परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गई थीं। पिछले कुछ सालों में मेरी पूरी पहचान एक पत्नी, बहू और मां तक सीमित हो गई है। हाल ही में जब बच्चों ने स्कूल जाना शुरू किया तो मुझे एहसास हुआ कि मेरा जीवन यूं ही निकला जा रहा है। मैंने अपना पूरा जीवन दूसरों को दे दिया है, लेकिन वो तो बड़े होकर चले जाएंगे। फिर मेरा क्या होगा। कभी लगता है कि मुझे दोबारा करियर शुरू करना चाहिए, कभी लगता है कि अब बहुत देर हो चुकी है। डरती हूं कि दूसरों की जरूरतें पूरी करते-करते कहीं अपनी पहचान न खो दूं। क्या यह आइडेंटिटी क्राइसिस है? मैं खुद को दोबारा कैसे खोजूं? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। ये समस्या आपकी अकेले की नहीं है। हजारों महिलाएं जीवन के किसी–न–किसी मोड़ पर ये महसूस करती हैं। वे अच्छी मां हैं, जिम्मेदार पत्नी हैं, परिवार की मजबूत आधारशिला हैं, लेकिन जब बात खुद की आती है तो जवाब धुंधला पड़ जाता है। अक्सर वे इस भावना को किसी से कह भी नहीं पातीं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग समझेंगे नहीं। लेकिन मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यह कोई असामान्य अनुभव नहीं है। यह एक डेवलपमेंटल स्टेज है। यह सिर्फ आइडेंटिटी क्राइसिस नहीं कई लोग इस स्थिति को केवल आइडेंटिटी क्राइसिस कह देते हैं। लेकिन पूरी तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। असल में इसके पीछे बहुत सी भावनाएं होती हैं, जैसकि– यानी यह केवल “मैं कौन हूं?” का सवाल नहीं है, बल्कि “अब मेरी अगली भूमिका क्या होगी?” का सवाल भी है। क्या आपने सचमुच कुछ नहीं किया? बहुत-सी महिलाएं कहती हैं, “मैं तो पिछले 10-15 साल से कुछ करती ही नहीं थी।” यही सबसे बड़ी गलतफहमी है। घर चलाना, बच्चों का पालन-पोषण करना और पूरे परिवार का प्रबंधन करना दुनिया के सबसे कठिन फुल-टाइम कामों में से एक है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसके लिए सैलरी नहीं मिलती। अगर घर चलाना एक कंपनी चलाना होता? अगर घर एक कंपनी होती या आप इतने साल घर में जो काम कर रही थीं, वही काम किसी कंपनी में कर रही होतीं तो आपकी क्या पोजिशन होती। इसलिए आपसे और सभी महिलाओं से मेरी रिक्वेस्ट है कि खुद को सिर्फ ‘हाउसवाइफ’ मत कहिए। असल में आप– फिर भी खालीपन क्यों महसूस होता है? जब बच्चे छोटे होते हैं, तब उन्हें हर वक्त, हरेक काम के लिए आपकी जरूरत होती है। लेकिन जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं तो ये सारे बदलाव आते हैं– इतने सालों में तब पहली बार ऐसा होता है कि आपके पास अपने लिए समय बचता है। तब मन पूछता है– क्या 34 की उम्र में नई शुरुआत मुमकिन नहीं? यह सबसे बड़ा मिथ है। 34 की उम्र में कोई देर नहीं हुई होती। एक्सपर्ट मानते हैं कि ये बेस्ट टाइम है। 34 की उम्र में आपके पास वह अनुभव है, जो 24 की उम्र में नहीं था। अब आपके पास ये चीजें हैं— यही गुण किसी भी अच्छे कर्मचारी और लीडर की पहचान होते हैं। कभी भी हो सकती है नई शुरुआत वयस्क विकास पर अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डैनियल लेविन्सन का काम बताता है कि जीवन कई चरणों में विकसित होता है। हरेक स्टेज में इंसान अपनी भूमिका और उद्देश्य का पुनर्मूल्यांकन करता है। करियर डेवलपमेंट एक्सपर्ट डोनाल्ड सुपर भी कहते हैं कि करियर जिंदगी में सिर्फ एक बार लिया गया फैसला नहीं है। यह एक प्रोसेस है, जो जिंदगी भर चलता है। समय के साथ बदलता और विकसित होता है। इसलिए सालों के करियर ब्रेक के बाद भी एक नई शुरुआत की संभावना कभी खत्म नहीं होती। इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले आप खुद से ये 5 सवाल पूछिए– आपकी जॉब स्किल्स कैसी हैं? यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में 5 सेक्शंस में कुल 16 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 1 से 5 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 1 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘हमेशा’ है तो 5 नंबर दें। अंत में अपना टोटल स्कोर देखें। इस ग्राफिक में कोई स्कोर इंटरप्रिटेशन नहीं है क्योंकि नंबर कम हों या ज्यादा, उससे ये निष्कर्ष नहीं निकलता कि आप कोई नया काम शुरू नहीं कर सकतीं। आपके स्किल्स क्या हैं? जॉब के लिए जिन भी स्किल्स की जरूरत होती है, घर संभालते हुए आपने वो स्किल्स पहले ही सीख लिए हैं, जैसेकि– चार हफ्तों का ‘कमबैक’ प्लान सप्ताह 1 खुद को दोबारा पहचानिए सप्ताह 2 करियर तलाशिए सप्ताह 3 वर्क कल्चर में वापसी सप्ताह 4 नौकरी की शुरुआत याद रखिए— पहली नौकरी मंजिल नहीं होती, अगले अवसर का दरवाजा होती है। रोज खुद से कहें ये 7 बातें इन सारी तैयारियों के साथ ये समझना भी जरूरी है कि आपका अपने साथ संवाद कैसा है। खुद से पॉजिटिव बातें करिए और रोज खुद को ये 7 बातें याद दिलाइए– प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी? वैसे तो आपकी प्रॉब्लम सेल्फ हेल्प से आसानी से दूर हो सकती है। लेकिन कभी भी अगर उदासी, अकेलापन ज्यादा बढ़े और उसका असर भोजन, नींद पर पड़े तो प्रोफेशनल हेल्प लेने में हिचकना नहीं चाहिए। अंतिम बात आपने सालों तक पूरे परिवार को संभाला और अपना व्यक्तित्व नहीं खोया। आज परिस्थितियां बदल रही हैं। बच्चे बड़े हो रहे हैं। जिम्मेदारियां बदल रही हैं। अब आपके जीवन का अगला और नया अध्याय शुरू हो रहा है। इस अध्याय को भी आप बहुत खूबसूरती से गढ़ेंगी। याद रखिए, आप पीछे नहीं लौट रहीं, बल्कि आगे बढ़ रही हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ- भीड़ में भी अकेली हूं: कोई मुझे समझता नहीं, किसी को मेरी परवाह नहीं, सब हैं, लेकिन दिल का साथी कोई नहीं, क्या करूं? इमोशनल लोनलीनेस (भावनात्मक अकेलापन) आज मेंटल हेल्थ डिसकशन का एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। पहली नजर में यह साधारण ‘अकेलेपन’ जैसा लगता है, लेकिन मनोविज्ञान इसे कहीं अधिक गहराई से समझता है। आगे पढ़िए…

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