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मेंटल हेल्थ– पति बहुत पजेसिव है:हर सेकेंड पूछता है– ‘कहां हो,’ बहुत घुटन होती है, लगता है शादी में नहीं, हर वक्त CCTV की निगरानी में हूं

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सवाल– मेरा पार्टनर (हसबैंड) मुझे बहुत प्यार करता है, लेकिन वह बहुत पजेसिव भी है। हर समय यह जानना चाहता है कि मैं कहां हूं, क्या कर रही हूं, किससे बात कर रही हूं और किसके साथ बाहर गई हूं। अगर मैं तुरंत फोन या मैसेज का जवाब नहीं देती तो वह नाराज हो जाता है। धीरे-धीरे मुझे ऐसा महसूस होने लगा है कि मैं किसी रिश्ते में नहीं, बल्कि निगरानी में जी रही हूं। उसकी इस आदत की वजह से मुझे घुटन महसूस होने लगी है। क्या यह सामान्य पजेसिवनेस है या किसी अस्वस्थ रिश्ते का संकेत? एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। देखिए, दो तरह की प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। जैसेकि– “तुम पहुंच जाओ तो मुझे एक मैसेज कर देना।” अगर आपका पार्टनर ऐसा कहता है तो यह उसकी चिंता भी है और प्यार भी। लेकिन अगर वह कहे— तो यह सिर्फ प्यार नहीं है। यह रिश्ते में बढ़ते नियंत्रण का संकेत भी हो सकता है। रिश्ते में एक-दूसरे की चिंता करना सामान्य है, लेकिन जब चिंता औ भरोसे की जगह शक लेने लगे और देखभाल, निगरानी में बदल जाए, तब उस व्यवहार को गंभीरता से समझने की जरूरत होती है। कोअर्सिव कंट्रोल मनोविज्ञान में इसे ‘कोअर्सिव कंट्रोल’ कहते हैं। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है— धीरे-धीरे किसी व्यक्ति की आजादी को इस तरह सीमित कर देना कि वह हर छोटे-बड़े फैसले के लिए भी खुद को स्वतंत्र महसूस न करे। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसकी शुरुआत अक्सर बहुत सामान्य दिखती है। क्या हर पजेसिव पार्टनर गलत होता है? नहीं। कुछ लोग अपने पुराने अनुभवों, असुरक्षा या रिश्ता टूटने के डर की वजह से जरूरत से ज्यादा आश्वासन चाहते हैं। अगर किसी व्यक्ति को हमेशा यह डर रहता है कि उसका साथी उसे छोड़ देगा, तो वह बार-बार फोन कर सकता है, जल्दी जवाब की उम्मीद कर सकता है या यह जानना चाह सकता है कि उसका पार्टनर कहां है। मनोविज्ञान में इसे ‘एंक्शस अटैचमेंट’ कहते हैं। लेकिन यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण है। किसी व्यक्ति की असुरक्षा, दूसरे व्यक्ति की आजादी छीनने का अधिकार नहीं बन जाती। अगर किसी को भरोसा करने में कठिनाई है तो उस समस्या का समाधान बातचीत, काउंसलिंग और विश्वास बनाने से होगा, निगरानी बढ़ाने से नहीं। क्या आपका रिश्ता चिंताजनक है? यह समझने के लिए आपको इन सवालों का जवाब देने की जरूरत है। खुद से ये 5 सवाल पूछें– अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो समस्या सिर्फ पजेसिवनेस नहीं हैं। ऐसे रिश्तों में लोग अपनी जरूरतों के बजाय पार्टनर के मूड के हिसाब से जीने लगते हैं। धीरे-धीरे उन्हें लगता है कि शायद गलती उन्हीं की है। कई शोध बताते हैं कि लंबे समय तक लगातार नियंत्रण में रहने वाले लोगों में तनाव, चिंता, अवसाद, आत्मविश्वास की कमी और हमेशा सतर्क रहने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। क्या आपका पति नार्सिसिस्ट है? कई बार जरूरत से ज्यादा नियंत्रण वाला व्यवहार नार्सिसिस्टिक प्रवृत्ति से भी जुड़ा हो सकता है। ऐसे लोगों में कुछ बातें देखने को मिल सकती हैं, जैसेकि— रिसर्च कहती है कि कुछ मामलों में नार्सिसिस्टिक प्रवृत्तियां और साथी पर नियंत्रण या दुर्व्यवहार एक साथ दिखाई दे सकते हैं। खासकर तब, जब व्यक्ति खुद को विशेष अधिकार वाला समझता हो, दूसरों का फायदा उठाने की कोशिश करता हो या आलोचना बिल्कुल बर्दाश्त न कर पाता हो। लेकिन सिर्फ इन व्यवहारों के आधार पर किसी को ‘नार्सिसिस्ट’ नहीं कहा जा सकता। इसलिए लेबल लगाने की बजाय एक्सपर्ट वैल्युएशन जरूरी है। क्या आपका रिश्ता कंट्रोलिंग है? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में 4 हिस्सों में कुल 22 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 2 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब ‘कभी नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘अक्सर’ है तो 2 नंबर दें। स्कोर इंटरप्रिटेशन की बात हम आगे करेंगे। इस असेसमेंट टेस्ट को कैसे समझें? यह कोई मेडिकल टेस्ट नहीं है। अगर– –तो इसे सामान्य पजेसिवनेस मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे में किसी भरोसेमंद व्यक्ति या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है। क्या बात करने से स्थिति बदल सकती है? अगर रिश्ते में हिंसा, धमकी या डर का माहौल नहीं है, तो सबसे पहले खुलकर बातचीत की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन बातचीत का उद्देश्य लड़ाई जीतना नहीं है। उद्देश्य यह समझना है कि आखिर ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है। शांत समय में आप अपने पार्टनर से कह सकती हैं— “मैं तुमसे लड़ना नहीं चाहती। मैं सिर्फ यह समझना चाहती हूं कि जब मैं तुरंत जवाब नहीं देती, तब तुम्हारे मन में क्या चलता है?” इसके बाद आप उनसे पूछ सकती हैं— ऐसे सवाल कई बार बहस को समझदारी वाली बातचीत में बदल देते हैं। आप दूसरे की भावना को समझते हुए अपनी बात कहें और बाउंड्री भी बनाएं। जैसेकि– “मुझे अच्छा लगता है कि तुम्हें मेरी चिंता रहती है। लेकिन जब मुझसे हर समय लोकेशन या हर बात का सबूत मांगा जाता है, तब मुझे ऐसा लगता है कि मुझ पर भरोसा नहीं किया जा रहा। मैं चाहती हूं कि हमारे रिश्ते में सुरक्षा भी रहे और भरोसा भी।” 7 दिन का रिलेशनशिप रियलिटी चेक (CBT आधारित आसान अभ्यास) आप अगले सात दिनों तक एक छोटी डायरी मेन्टेन करिए और हर घटना के बाद ये 6 बातें लिखिए— सिर्फ एक सप्ताह में आपको कई पैटर्न दिखाई देने लगेंगे, जैसेकि— कई बार लिखना यह समझने में मदद करता है कि समस्या वास्तव में कितनी बड़ी है। बातचीत के बाद क्या देखें? हर रिश्ता कभी-न-कभी मुश्किल दौर से गुजरता है। इसलिए सिर्फ एक बातचीत से किसी नतीजे पर पहुंचना ठीक नहीं है। असली बात यह है कि बातचीत के बाद आपके पार्टनर के व्यवहार में क्या बदलाव आता है। अगर वह- तो यह रिश्ते के लिए अच्छा संकेत है। लेकिन अगर बातचीत के बाद भी… तो यह संकेत है कि समस्या सिर्फ गलतफहमी नहीं है, बल्कि रिश्ते का एक दोहराया जाने वाला पैटर्न बन चुकी है। कब अकेले में बात नहीं करनी चाहिए? हर रिश्ते की समस्या सिर्फ बातचीत से हल नहीं होती। अगर आपका पार्टनर— –तो ऐसी स्थिति में घर में अकेले बैठकर बहस करना सुरक्षित नहीं है। ऐसे में किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य, दोस्त या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। रिश्ता बचाने के पांच नियम किसी भी रिश्ते की मजबूत नींव सिर्फ प्यार नहीं, बल्कि भरोसा, सम्मान और बराबरी होती है। रिश्ते में विश्वास मजबूत करने के लिए इन 6 बातों का ध्यान रखना जरूरी है। अंतिम बात जीवन में ये चंद जरूरी बातें हमेशा याद रखें–

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