उदय निधि स्टालिन अपने तीखे बयानों के लिए जाने जाते है, लेकिन उदय निधि जब तृषा और थलपति विजय के संबंधों पर सार्वजनिक मंच पर टिप्पणी करते हैं, तो इस बयान की लानत मलानत नहीं होती, बल्कि भीड़ ताली बजाती है, सीटी बजाती है. किसी को बुरा नहीं लगाता है, क्योंकि समाज में किसी पुरुष पर निशाना साधने के लिए उसकी पत्नी उसकी दोस्त, उसकी बहन या कोई भी महिला जो उसके करीब है, उसे बदजुबानी के कटघरे में खींच ले आना समाज में स्वीकार्य है. अगर ऐसा नहीं होता, तो सोचिए विराट कोहली जीरो पर आउट हो जाए मैदान पर कुछ मिस्टेक कर जाए, तो क्या इसी देश में अनुष्का शर्मा को मनहूस नहीं कहा गया. ये फिर आ गई ये तो पनौती है.

