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बुक रिव्यू- किताबों के रास्ते खुद को खोजने की कहानी:आम जिंदगियों का खास दस्तावेज, यह किताब पढ़ने के लिए नहीं, जीने के लिए है

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किताब: आप जो ढूंढ़ रहे हैं, वह मिलेगा लाइब्रेरी में (अंग्रेजी किताब ‘व्हाट यू आर लुकिंग फॉर इज इन द लाइब्रेरी’ का हिंदी अनुवाद) लेखक: मिचिको आओयामा अनुवाद: डॉ. रोहिणी प्रकाशक: पेंगुइन मूल्य: 399 रुपए हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसा दौर आता है, जब उसे लगता है कि वह देर कर चुका है। सही नौकरी का मौका निकल गया, अब शायद कुछ नया नहीं होगा। मिचिको आओयामा की किताब ‘आप जो ढूंढ़ रहे हैं वह मिलेगा लाइब्रेरी में’ ऐसे ही लोगों की कहानी है। इसमें मोटिवेशनल भाषण नहीं हैं। इसमें यह नहीं बताया गया कि अपने सपनों का पीछा करो या खुद पर भरोसा रखो। यह तो बस कुछ साधारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगियों को बयां करती है और धीरे-धीरे एहसास कराती है कि उम्मीद अक्सर वहीं छिपी होती है, जहां हम आगे देखना बंद कर देते हैं। इस किताब की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसे पढ़ते हुए आप किरदारों के बीच खुद को खोजने लगते हैं। किताब का सबसे यादगार किरदार सायुरी कोमाची इस किताब की सबसे खास और याद रह जाने वाली किरदार हैं। वह एक साधारण लाइब्रेरियन हैं और लोगों को खुद को समझने का एक नया नजरिया देती हैं। उनकी मुस्कान, कम शब्दों में बात करने का अंदाज और हर व्यक्ति के लिए चुनी गई एक खास किताब… यह सब उन्हें बेहद अलग बनाता है। कोमाची की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह किसी को सलाह नहीं देतीं। वह सिर्फ एक किताब और एक छोटा-सा बोनस गिफ्ट थमा देती हैं। उसके बाद इंसान खुद अपनी जिंदगी के जवाब खोजता है। किताब खत्म होने के बाद भी सायुरी कोमाची लंबे समय तक याद रहती हैं। वह यह एहसास कराती हैं कि कई बार एक सही किताब, एक छोटी-सी चीज और किसी का भरोसा ही इंसान की जिंदगी को नई दिशा देने के लिए काफी होता है। ग्राफिक में किताब की 9 मुख्य बातें देखिए- वे किस्से, जो याद रह जाते हैं इस किताब में कोई बड़ा ट्विस्ट नहीं है, लेकिन कई छोटे दृश्य ऐसे हैं जो पढ़ने के बाद मन में रह जाते हैं। एक रिटायर बुजुर्ग स्कूल के बाहर बच्चों को खेलते हुए देख रहे हैं और पुलिस उन्हें शक की नजर से देखती है। यह घटना पढ़ते समय दुख होता है, लेकिन बाद में समझ आता है कि दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं। मिस्टर एबिगावा की खिड़की भी लंबे समय तक याद बनी रहती है। वह कहते हैं कि हमें यह भ्रम होता है कि कांच की एक परत हमें अलग कर देती है, जबकि असल में हम सभी एक ही दुनिया का हिस्सा हैं। आखिर में मसाओ का अपनी पत्नी के लिए चुपके-चुपके नोजावाना राइस बॉल बनाना… शायद पूरी किताब का सबसे मानवीय दृश्य है। किताब की सबसे असरदार बात इस किताब की सबसे असरदार बात यह है कि यह किसी बड़े चमत्कार या असाधारण सफलता की कहानी नहीं सुनाती, बल्कि साधारण लोगों की साधारण जिंदगी में छिपी असाधारण उम्मीद को सामने लाती है। कहानी बार-बार यह एहसास कराती है कि कई बार हमें अपनी जिंदगी बदलने के लिए किसी बड़े फैसले की नहीं, बल्कि एक सही किताब, एक छोटी-सी बातचीत की जरूरत होती है। किताब यह भी बताती है कि इंसान की पहचान सिर्फ उसकी नौकरी या उसकी उपलब्धियों से नहीं होती। समाज का हिस्सा होने का मतलब है लोगों से जुड़ना, उनके जीवन में छोटी-छोटी मौजूदगी दर्ज कराना और उन रिश्तों को समझना है, जो अक्सर हमारी नजर से छूट जाते हैं। भाषा और लिखने का ढंग मिचिको आओयामा की भाषा नदी की तरह बहती है। वह आपको रुलाने की कोशिश नहीं करतीं, लेकिन कई जगह अचानक गला भर आता है। वे बड़ी बातों को छोटे दृश्यों में कहती हैं। एक केकड़ा, एक ऊनी खिलौना, एक खिड़की, एक कुकी, एक किताब… साधारण चीजें धीरे-धीरे प्रतीक बन जाती हैं। इस किताब में जापानी समाज की सादगी भी दिखाई देती है और वह ठहराव भी, जिसमें लोग कम बोलते हैं, लेकिन बहुत कुछ महसूस करते हैं। सबसे अच्छी बात यह लगी कि लेखिका कहीं भी उपदेश नहीं देती हैं। कैरेक्टर अपनी गलतियों के साथ चलते हैं, सीखते हैं और थोड़ा-थोड़ा बदलते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे आम इंसान की जिंदगी में सबकुछ धीरे-धीरे होता है। यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? आज के समय में जब हर जगह कामयाबी, टारगेट और कॉम्पिटिशन की बातें हो रही हैं, यह किताब थोड़ा ठहरना सिखाती है। यह बताती है कि इंसान की पहचान सिर्फ उसकी नौकरी तक सीमित नहीं होती। जीवन में रास्ते बदलना सामान्य बात है। छोटे-छोटे रिश्ते भी हमें टूटने से बचा सकते हैं। अगर कभी आपको लगा हो कि आप दूसरों से पीछे छूट गए हैं, अगर कभी अपने काम का मतलब समझ नहीं आया हो या अगर आपको लगता हो कि आपकी जिंदगी में अब कुछ नया नहीं बचा, तो यह किताब आपके लिए है। यह आपको जोश से भले नहीं भरती, लेकिन जरूरी उम्मीद देती है। किताब के बारे में मेरी राय मेरे लिए यह किताब उम्मीद की कहानी है। यह बताती है कि हम सब किसी-न-किसी बड़ी मशीन का छोटा-सा पुर्जा नहीं, बल्कि एक-दूसरे की कहानियों का हिस्सा हैं। कभी एक किताब किसी इंसान को बदल देती है, कभी एक लाइब्रेरियन, कभी एक बेटी, कभी एक बूढ़ा चौकीदार और कभी सिर्फ एक खिड़की। किताब खत्म होने के बाद मेरे मन में बार-बार एक ही बात आती रही कि शायद हम सभी अपनी-अपनी लाइब्रेरियों में भटक रहे हैं। हम किसी खास किताब, किसी नौकरी, किसी रिश्ते या किसी जवाब की तलाश में होते हैं। लेकिन लौटते समय पता चलता है कि हमने सबसे ज्यादा खुद को खोजा है। यही इस किताब की सबसे बड़ी खूबसूरती है। …………………………. ये खबर भी पढ़ें… बुक रिव्यू- विज्ञान में दर्शन, दर्शन में विज्ञान:ये किताब दोनों को जोड़कर जीवन को देखना सिखाती है, दुनिया के रहस्य सुलझाती है दर्शन यानी फिलॉसफी और विज्ञान दो अलग चीजें मानी जाती हैं, लेकिन दोनों की मंजिल एक ही है- सत्य की खोज। इंडियन फिलॉसफी चेतना, अस्तित्व और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने की कोशिश करती है। वहीं ‘क्वांटम फिजिक्स’ उन्हीं सवालों के जवाब वैज्ञानिक नजरिए से तलाशती है। पूरी खबर पढ़ें…

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