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पवन के. वर्मा का कॉलम:नागरिकों को भरोसे के दायरे में जीना चाहिए या संदेह के?

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एक राजनयिक के रूप में मेरी विदेशों में नियुक्तियां रही हैं और मैंने दुनिया की यात्रा की है। मेरे पासपोर्ट में मुझे भारत-गणराज्य का नागरिक, एक उभरती हुई शक्ति और महान सभ्यता का प्रतिनिधि बताया जाता रहा। वह मेरे लिए गर्व का विषय रहा है। इसीलिए जब हाल ही में विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो मैं उलझन में पड़ गया। सरकार के अपने कारण हो सकते हैं, लेकिन दशकों तक भारतीयों की यह समझ रही है कि पासपोर्ट उनकी नागरिकता की औपचारिक पुष्टि है। इसे प्राप्त करने की प्रक्रिया से पहले व्यापक जांचें होती हैं। आवेदकों को दस्तावेज प्रस्तुत करने, अपनी पहचान स्थापित करने, निवास का प्रमाण देने और पुलिस सत्यापन से गुजरना पड़ता है। पासपोर्ट केवल इसलिए जारी नहीं किया जाता कि कोई व्यक्ति विदेश यात्रा करना चाहता है, बल्कि इसलिए किया जाता है कि राज्यसत्ता इस बात से संतुष्ट होती है कि आवेदक भारतीय नागरिक है। वास्तव में, पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6(2)(ए) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पासपोर्ट केवल भारत के नागरिक को ही जारी किया जा सकता है। इस दस्तावेज का भावनात्मक महत्व उसकी प्रशासनिक उपयोगिता से भी अधिक था। यह व्यक्ति और राष्ट्र के बीच एक संबंध का प्रतिनिधित्व करता था। विदेश यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए यह केवल एक पुस्तिका नहीं, बल्कि पहचान और अपनेपन की घोषणा थी। यह सच है कि तथ्यों को छिपाकर, दस्तावेजों की जालसाजी करके या अपनी पहचान के बारे में गलत जानकारी देकर धोखाधड़ीपूर्वक भी पासपोर्ट प्राप्त किए जा सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में राज्यसत्ता को पासपोर्ट रद्द करने और दोषी के विरुद्ध अभियोजन चलाने का पूरा अधिकार है। लेकिन इस आधार पर इस धारणा को खारिज नहीं किया जाना चाहिए कि विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत जारी किया गया एक वैध पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण है। मतदाता पहचान-पत्र भी धोखाधड़ी से प्राप्त किया जा सकता है। राशन कार्ड में भी हेरफेर किया जा सकता है। आधार कार्ड का भी दुरुपयोग किया जा सकता है। संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की जालसाजी की जा सकती है। भारत में दस्तावेजीकरण की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में यह प्रश्न और अधिक चिंताजनक हो जाता है। आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। मतदाता पहचान-पत्र नागरिकता का प्रमाण नहीं है। राशन कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है। जन्म प्रमाण-पत्रों को भी अक्सर प्रक्रियात्मक आधारों पर चुनौती दी जाती है। अब यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो प्रश्न उठता है कि नागरिकता का प्रमाण है क्या? कोई भी आधुनिक राष्ट्र अस्पष्टता के आधार पर कार्य नहीं कर सकता। नागरिकता कोई हवा-हवाई चीज नहीं है, इसी पर अंततः सभी संवैधानिक अधिकार आधारित होते हैं। मताधिकार का प्रयोग करने, कानूनी संरक्षण का दावा करने, सरकारी लाभ प्राप्त करने या संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपभोग करने से पहले किसी व्यक्ति का नागरिक के रूप में मान्यता प्राप्त होना आवश्यक है। यदि कोई भी दस्तावेज इस स्थिति को निर्णायक रूप से स्थापित नहीं करता, तो दारोमदार व्यक्ति पर आ जाता है। कहां तो राज्यसत्ता को ही अपनी संस्थाओं और दस्तावेजों के माध्यम से नागरिक की नागरिकता प्रमाणित करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय नागरिक को बार-बार यह सिद्ध करने के लिए बाध्य होना पड़ता है कि वह इसी देश का है। जब राज्य स्वयं उन दस्तावेजों को जारी करने के बावजूद- जो परंपरागत रूप से नागरिकता को प्रमाणित करते रहे हैं- नागरिकता पर प्रश्न उठाता है, तो नागरिक अनिश्चितता की स्थिति में पहुंच जाता है। उसके पास दस्तावेज तो होते हैं, पर नाकाफी। वह प्रक्रियाओं का पालन करता है, लेकिन कोई निश्चितता प्राप्त नहीं होती। यदि नागरिकता विवाद का विषय बनी रहती है, तो अधिकारियों को अतिरिक्त प्रमाण मांगने का अधिक अधिकार मिल जाता है। नागरिक मनमानी व्याख्याओं और नौकरशाही की संतुष्टि पर निर्भर हो जाते हैं। अमेरिका, यूके, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों में पासपोर्ट को नागरिकता के सशक्त प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है, क्योंकि उसे जारी करने से पहले नागरिकता का सत्यापन किया जाता है। वास्तविक समाधान दस्तावेज जारी करने के समय जांच-प्रक्रिया को अधिक सुदृढ़ बनाने, सत्यापन तंत्र में सुधार करने, विभिन्न डेटाबेसों का एकीकरण करने तथा धोखाधड़ी के विरुद्ध कठोर दंड लागू करने में निहित है। इस बहस के केंद्र में एक और प्रश्न निहित है। लोकतंत्र में नागरिक को वैधता की पूर्व-धारणा के साथ जीना चाहिए या संदेह की? यदि नागरिकता निरंतर विवाद का विषय बनी रहती है, तो अधिकारियों को अतिरिक्त प्रमाण मांगने का अधिक अधिकार मिल जाता है। तब नागरिक मनमानी व्याख्याओं और नौकरशाही की संतुष्टि पर निर्भर हो जाते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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