नेपाल में सैलाब के एक हफ्ते बाद भी हालात बेहद भयावह हैं. चारों तरफ शव बिखरे पड़े हैं. जो लोग घरों से निकल नहीं पाए, उनके शव अब घरों की छतों पर रखे हैं, क्योंकि चारों तरफ दलदल है और पैदल शवों को निकालना मुमकिन नहीं. इसलिए हेलीकॉप्टर छतों के ऊपर जाकर शवों को उठाकर दूसरी जगह पहुंचा रहे हैं. अब तक रेस्क्यू में 950 से ज्यादा शव निकाले जा चुके हैं और 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं. कई शवों की पहचान नहीं हो पा रही, इसलिए सामूहिक तौर पर गड्ढा खोदकर, प्लास्टिक बैग्स में पैक कर उन्हें दफनाया जा रहा है. DNA सैंपल लिए जा रहे हैं ताकि बाद में परिजन पहचान सकें. एक पिता अपने इकलौते बच्चे के शव के लिए रो रहा है जो विदेश जा रहा था. चारों तरफ मातम पसरा है. सबसे बड़ा खतरा अब महामारी का है. मलबे में दबे शव सड़ने लगे हैं और मोर्चरी जैसी दुर्गंध आ रही है. बताया जा रहा है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद सीवर, मरे जानवर और केमिकल वाला गंदा पानी रह गया है. इससे हैजा, टाइफाइड, डेंगू, लिवर और आंखों का इंफेक्शन, स्किन गलने का खतरा है. भारत दवाएं और क्लोरीन की गोलियां भेज रहा है.

