बीमारी को पहचानने और उसका इलाज करने का मुख्य आधार है- ब्लड टेस्ट। लेकिन अगर टेस्ट से पहले सही तैयारी न की जाए, तो रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट प्रभावित होने से इलाज भी प्रभावित हो सकता है। जानकारी न होने से कई बार लोग बिना जरूरत के भी फास्टिंग कर लेते हैं, या फास्टिंग वाले टेस्ट से पहले चाय-कॉफी पी लेते हैं या दवा खा लेते हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम बात करेंगे कि ब्लड टेस्ट कराने का सही तरीका क्या है। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. मनीषा अग्रवाल, कंसल्टेंट- क्लिनिकल पैथोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- क्या हर ब्लड टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी होती है? जवाब- नहीं। हर ब्लड टेस्ट के लिए फास्टिंग (खाली पेट रहना) जरूरी नहीं होती। कई जांचें बिना फास्टिंग के भी उतनी ही सटीक होती हैं। इसलिए ब्लड टेस्ट से पहले खुद से फास्टिंग करने या न करने का फैसला न करें। जो टेस्ट कराना है, उसके लिए डॉक्टर या लैब के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करें। सवाल- किन टेस्ट के लिए 8-12 घंटे फास्टिंग जरूरी होती है? जवाब- पूरी लिस्ट नीचे ग्राफिक में देखें- सवाल- किन टेस्ट के लिए फास्टिंग जरूरी नहीं होती? जवाब- पूरी लिस्ट नीचे ग्राफिक में देखें- सवाल- क्या फास्टिंग के दौरान पानी पी सकते हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझें- सवाल- क्या फास्टिंग के दौरान चाय, कॉफी या जूस पी सकते हैं? जवाब- नहीं। अगर किसी ब्लड टेस्ट के लिए फास्टिंग की सलाह दी गई है, तो चाय, कॉफी, जूस, दूध, सॉफ्ट ड्रिंक या कोई भी कैलोरी वाला पेय नहीं पीना चाहिए। ये ब्लड शुगर, इंसुलिन और कुछ अन्य जांचों के परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। फास्टिंग के दौरान सिर्फ सादा पानी ही पिएं। सवाल- क्या ब्लड सैंपल देने से पहले सुबह थायरॉइड की दवा ले सकते हैं? जवाब- आमतौर पर नहीं। यदि थायरॉइड फंक्शन टेस्ट (TSH, T3, T4) कराना है तो ब्लड सैंपल देने के बाद थायरॉइड की दवा लेना बेहतर है। दवा पहले लेने से कुछ थायरॉइड हॉर्मोन का स्तर अस्थाई रूप से बदल सकता है, जिससे रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है। हालांकि अगर किसी दूसरे ब्लड टेस्ट के लिए सैंपल दे रहे हैं और थायरॉइड का टेस्ट नहीं होना है, तो सुबह थायरॉइड की दवा ले सकते हैं। सवाल- ब्लड टेस्ट से पहले क्या करें? जवाब- पॉइंटर्स से समझें- सवाल- ब्लड टेस्ट से पहले क्या न करें? जवाब- पॉइंटर्स से समझें- सवाल- कौन-कौन सी दवाएं रिपोर्ट बदल सकती हैं? जवाब- पॉइंटर्स से समझिए- स्टेरॉयड- ब्लड शुगर, WBC (व्हाइट ब्लड सेल्स) और अन्य पैरामीटर बदल सकते हैं। थायरॉइड की दवा- थायरॉइड फंक्शन टेस्ट प्रभावित हो सकता है। आयरन सप्लीमेंट- आयरन प्रोफाइल रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है। बायोटिन (हेयर-स्किन-नेल सप्लीमेंट)- थायरॉइड, ट्रोपोनिन समेत कई इम्यूनो टेस्ट की रिपोर्ट गलत आ सकती है। विटामिन बी 12 और विटामिन D सप्लीमेंट- इनके स्तर की जांच प्रभावित हो सकती है। डायबिटीज की दवाएं और इंसुलिन- ब्लड शुगर की रिपोर्ट बदल सकती है। ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली दवाएं)- खून जमने से जुड़े टेस्ट प्रभावित हो सकते हैं। सवाल- एक्सरसाइज करने के बाद ब्लड टेस्ट कराने से क्या नुकसान हो सकता है? जवाब- पॉइंटर्स से समझें- सलाह: ब्लड टेस्ट से कम से कम 24 घंटे पहले भारी वर्कआउट से बचें। सामान्य टहलने या हल्की गतिविधि से समस्या नहीं है। सवाल- क्या शराब पीने से रिपोर्ट बदल सकती है? जवाब-हां। ब्लड टेस्ट से पहले शराब पीने से कई जांचों के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं, जैसेकि- सलाह: बेहतर और सटीक रिपोर्ट के लिए ब्लड टेस्ट से कम-से-कम 24 घंटे पहले शराब न पिएं। सवाल- क्या सिगरेट पीने से रिपोर्ट बदल सकती है? जवाब- हां। ब्लड टेस्ट से ठीक पहले सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कुछ जांचों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है, जैसेकि- सलाह: बेहतर और सटीक रिपोर्ट के लिए ब्लड सैंपल देने से कम-से-कम 1-2 घंटे पहले धूम्रपान न करें। यदि फास्टिंग टेस्ट है, तो फास्टिंग के दौरान धूम्रपान से पूरी तरह बचें। सवाल- क्या नींद पूरी न होने से भी रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है? जवाब- हां। पूरी नींद न लेने से कुछ ब्लड टेस्ट के नतीजों पर असर पड़ सकता है, जैसेकि- सलाह: सटीक रिपोर्ट के लिए ब्लड टेस्ट से पहले 7-8 घंटे अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। सवाल- क्या पीरियड्स के दौरान महिलाओं की रिपोर्ट प्रभावित हो सकती है? जवाब- हां। पीरियड्स के दौरान कुछ ब्लड टेस्ट के नतीजों पर असर पड़ सकता है, जैसेकि- सलाह: अगर हार्मोन संबंधी जांच करानी है, तो डॉक्टर द्वारा बताए गए मासिक चक्र के सही दिन ही टेस्ट कराएं। लैब को यह जरूर बताएं कि आपके पीरियड्स चल रहे हैं। बाकी जेनेरिक CBC टेस्ट पीरियड्स के दौरान न करवाना ही बेहतर है। सवाल- क्या ब्लड टेस्ट सुबह ही कराना बेहतर होता है? जवाब- यह टेस्ट पर निर्भर करता है। हर ब्लड टेस्ट सुबह कराना जरूरी नहीं होता, लेकिन कुछ जांचें सुबह और तय समय पर कराने से ज्यादा सटीक रिजल्ट मिलता है। इसे पॉइंटर्स से समझें- सलाह: यदि किसी टेस्ट को बार-बार कराना हो, तो हर बार लगभग एक ही समय पर जांच कराना बेहतर होता है, ताकि रिपोर्ट की तुलना सही तरीके से की जा सके। सवाल- क्या हर बार एक ही लैब से टेस्ट कराना चाहिए? जवाब- जरूरी तो नहीं है, लेकिन अगर किसी बीमारी की नियमित मॉनिटरिंग हो रही है, तो हर बार एक ही विश्वसनीय और मान्यता प्राप्त लैब से टेस्ट कराना बेहतर माना जाता है। इससे अलग-अलग मशीनों, जांच तकनीकों और रेफरेंस वैल्यू की वजह से होने वाले छोटे-मोटे अंतर से बचा जा सकता है। इससे रिपोर्ट की तुलना करना आसान होता है। अगर लैब बदलनी पड़े, तो रिपोर्ट दिखाते समय डॉक्टर को यह जरूर बताएं कि जांच अलग लैब में कराई गई है। …………………. जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- क्या कोलेस्ट्रॉल सचमुच हमारा दुश्मन है?: डॉक्टर से समझें गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल का साइंस, ये कब जरूरी और कब खतरनाक कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में एक ही बात आती है, यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। कोलेस्ट्रॉल हमारी कोशिकाओं, हार्मोन और विटामिन D के निर्माण के लिए जरूरी है। परेशानी तब शुरू होती है, जब शरीर में इसका संतुलन बिगड़ जाता है और खासतौर पर LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। पूरी खबर पढ़िए…



