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एअर इंडिया ने इंटरनेशनल उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज घटाया:नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के टिकट ₹7,617 तक सस्ते होंगे; घरेलू उड़ानों में बदलाव नहीं

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टाटा ग्रुप की विमानन कंपनी एअर इंडिया ने नॉर्थ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और UK जाने वाली अपनी उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज कम करने का एलान किया है। PTI के सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल के दामों में आई कमी के बाद एयरलाइन ने यह कदम उठाया है, जिससे इन रूटों पर अंतरराष्ट्रीय हवाई सफर करने वाले यात्रियों की जेब का बोझ कम होगा। नई दरें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। हालांकि घरेलू उड़ानों पर कोई बदलाव नहीं किया गया है। दूसरे देशों के लिए सरचार्ज की स्थिति घरेलू रूट पर कोई राहत नहीं सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि इन विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय रूटों के अलावा अन्य विदेशी उड़ानों और एयरलाइन की घरेलू (डोमेस्टिक) सेवाओं के लिए फ्यूल सरचार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वे पहले की तरह ही बने रहेंगे। इस मामले पर फिलहाल एअर इंडिया की तरफ से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। अप्रैल में मिडिल ईस्ट संकट के कारण बढ़ाया था सरचार्ज एअर इंडिया ने इस साल 7 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की थी, जो 10 दिन बाद यानी 10 अप्रैल से लागू हुआ था। उस समय पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आया था। तेल की ऊंची कीमतों और हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) पर लगे प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन का ऑपरेशनल खर्च काफी बढ़ गया था। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एयरलाइन ने तब बताया था कि फरवरी के अंत में वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की औसत कीमत 99.40 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 27 मार्च को समाप्त सप्ताह में करीब 100% बढ़कर 195.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। इसी कारण कंपनी को सरचार्ज लगाने पर मजबूर होना पड़ा था। दूरी के हिसाब से तय होता है सरचार्ज 7 अप्रैल को की गई घोषणा के दौरान एअर इंडिया ग्रुप (एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस शामिल हैं) ने कुछ चुनिंदा रूटों को छोड़कर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 24 डॉलर से 280 डॉलर तक और घरेलू उड़ानों के लिए 299 रुपए से 899 रुपए तक का फ्यूल सरचार्ज तय किया था। एयरलाइन ने बयान में कहा था कि घरेलू ATF कीमतों में बढ़ोतरी को 25% पर सीमित (कैप) करने के सरकार के फैसले के बाद, ग्रुप ने एक नपा-तुला रुख (कैलिब्रेटेड एप्रोच) अपनाया है। इसके तहत घरेलू उड़ानों पर एक समान (फ्लैट) सरचार्ज लगाने के बजाय दूरी के हिसाब से (डिस्टेंस-बेस्ड ग्रिड) सरचार्ज तय किया गया था। एविएशन सेक्टर में किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च में लगभग 40 से 45% हिस्सा अकेले जेट फ्यूल (ATF) का होता है, इसलिए ईंधन के दामों का असर सीधे टिकट की कीमतों पर पड़ता है। एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च है जेट फ्यूल जेट फ्यूल की कीमतें बढ़ने के चलते दुनियाभर की एयरलाइंस ने न सिर्फ टिकट के दाम बढ़ा दिए हैं, बल्कि अपने भविष्य के वित्तीय अनुमानों यानी फाइनेंशियल आउटलुक को भी वापस लिया है। एयरलाइंस के लिए जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च होता है। कुल ऑपरेटिंग खर्च में इसकी हिस्सेदारी 30% से 40% होती है।

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