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इंग्लैंड की वेटलिफ्टर एमिली कैंपबेल सेलिब्रिटी मास्टरशेफ भी:कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले दोस्त की प्रेरणा पर शो में लिया हिस्सा, बनाई सिग्नेचर डिश

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खेल के मैदान पर पसीना बहाने वाले एथलीट्स अगर किचन में भी अपना कमाल दिखाएं, तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। दुनिया के बेहतरीन फुटबॉलर अर्लिंग हालेंड के वायरल ‘टोमाहॉक स्टेक’ कुकिंग वीडियो के बाद, अब इंग्लैंड की स्टार वेटलिफ्टर एमिली कैंपबेल ने इस धारणा को और मजबूत किया है। 32 वर्षीय एमिली ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता है। दिलचस्प बात यह है कि दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट एमिली कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने से ठीक पहले मशहूर टीवी शो ‘सेलिब्रिटी मास्टरशेफ’ के किचन में अपनी कुकिंग का जलवा बिखेर रही थीं, जहां उन्होंने अपनी सिग्नेचर डिश ‘कैरेबियन करीड मटन’ बनाई थी। एमिली ने 86+ किग्रा में कुल 278 किलो (115 किलो स्नैच + 163 किलो क्लीन एंड जर्क) वजन उठाकर गेम्स का नया रिकॉर्ड कायम किया है। पेरिस ओलिंपिक की एकमात्र ब्रिटिश वेटलिफ्टर रहीं एमिली वहां से भी सिल्वर मेडल लेकर लौटी थीं। एमिली कहती हैं, ‘वेटलिफ्टर की पहचान से अलग हटकर कुछ और करना मेरे लिए बहुत सुखद रहा। खाना बनाना हमेशा से मेरा पैशन रहा है, लेकिन मास्टरशेफ में हिस्सा लेना वेटलिफ्टिंग से कहीं ज्यादा घबराहट वाला अनुभव था।’ एक एथलीट के तौर पर अपनी ताकत बरकरार रखने के लिए एमिली को रोजाना 3,500 कैलोरी की जरूरत होती है। यही वजह है कि उन्हें ज्यादा मात्रा में खाना बनाने की आदत हो गई है। एमिली बताती हैं कि ट्रेनिंग कैंप्स के दौरान वे अक्सर अपने साथी एथलीट्स के लिए शेफ की भूमिका निभाती हैं। नॉटिंघम में पली-बढ़ीं एमिली के कुकिंग शौक के पीछे उनके बचपन की यादें हैं। हर रविवार उनके पिता कैरेबियन डिशेज बनाते थे, जिसकी खुशबू से उनकी सुबह होती थी। एमिली अब भी साल्मन, ग्रिल्ड सब्जियां, चिकन लक्सा, जापानी कुजीन और स्पगेटी बोलोग्नीस जैसी डिशेज खुद पकाती हैं। मास्टरशेफ में हिस्सा लेने की प्रेरणा उन्हें अपनी दोस्त कदीना कॉक्स से मिली थी, जिन्होंने खाने से जुड़ी अपनी मानसिक बीमारी (बुलिमिया) को हराकर वह शो जीता था। एमिली का यह कामयाबी भरा सफर शुरुआत में बिल्कुल भी आसान नहीं था। एक समय था, जब उनके पोषण के लिए स्थानीय फल-सब्जी वाले उन्हें मुफ्त में राशन दे जाते थे ताकि उनकी डाइट पूरी हो सके। यहां तक कि क्राउडफंडिंग के जरिए स्थानीय मोचियों ने उनके लिए वेटलिफ्टिंग बेल्ट बनाई थी। आज वही एमिली खुद अपने ‘मील्स-टू-मसल’ (भोजन से ताकत तक) के सफर की कमान पूरी तरह से संभाल रही हैं और न्यूट्रिशनिस्ट्स पर निर्भर रहने के बजाय अपनी डाइट खुद डिजाइन करती हैं। वह दुनिया को साबित कर रही हैं कि एथलीट्स न सिर्फ मैदान पर मेडल जीत सकते हैं, बल्कि किचन में भी असली चैम्पियन बन सकते हैं।

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