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अमेरिका में AI का विरोध,10 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट रद्द:40% वोटर्स बोले- उद्योगों में एआई पर लगे प्रतिबंध, भविष्य में विवाद बढ़ने की आशंका‎

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में हो रही‎ तेज प्रगति को लेकर तकनीकी विशेषज्ञ शुरू से‎ चिंतित रहे हैं, लेकिन अब आम लोग भी इसे‎ लेकर असहज महसूस करने लगे हैं। पश्चिमी‎ देशों में एआई की लोकप्रियता घट रही है और‎ यह तेजी से राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी विरोध बढ़ रहा है।‎दक्षिण कोरिया में चिप निर्माता कंपनियों के मुनाफे‎ में जबरदस्त बढ़ोतरी के बाद सैमसंग के‎ कर्मचारियों ने विशेष बोनस की मांग करते हुए ‎हड़ताल की चेतावनी दे दी है।‎ अब तक सबसे तीखी बहस अमेरिका में देखने‎ को मिली है। वहां एआई के विरोध में डेटा सेंटरों ‎के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के कारण करीब 10‎ लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट अटक गए हैं। वहीं,‎करीब 40% अमेरिकी मतदाता चाहते हैं कि‎ अधिकांश उद्योगों में एआई के उपयोग पर प्रतिबंध‎ लगा दिया जाए। एआई के विरोध का एक कारण‎ यह भी है कि एआई कंपनियों के प्रमुख लंबे‎ समय से चेतावनी देते रहे हैं कि एआई करोड़ों‎ नौकरियां खत्म कर सकता है या फिर एआई द्वारा‎ तैयार किया गया कोई सुपर-वायरस मानव‎ सभ्यता के लिए खतरा बन सकता है।‎ अमेरिका में एआई निवेश केवल तकनीकी केंद्रों तक सीमित नहीं है। अमेजन, गूगल, मेटा,माइक्रोसॉफ्ट और ओरेकल जैसी कंपनियां मिशिगन, विस्कॉन्सिन, ओहायो, लुइसियाना,मिसीसिपी और टेक्सास समेत कई राज्यों में भविष्य के डेटा सेंटरों पर 70.85 लाख करोड़ रुपए निवेश कर रही हैं। अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच दुनिया में एआई डेटा सेंटरों पर 283 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसके चलते एआई की कंप्यूटिंग क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। अमेरिका में डेटा सेंटरों की बिजली खपत मौजूदा 12 गीगावॉट से दशक के अंत तक लगभग पांच गुना यानी करीब 60 गीगावॉट तक हो सकती है। इसी बढ़ती ऊर्जा जरूरत और पर्यावरणीय असर को लेकर विरोध तेज हो रहा है। स्थानीय लोग डेटा सेंटरों के जनरेटर और कूलिंग सिस्टम से होने वाले शोर, नए ट्रांसमिशन टावरों, पानी के संभावित प्रदूषण और बढ़ते बिजली दबाव पर सवाल उठा रहे हैं। कई सर्वेक्षण बताते हैं कि भविष्य में कई अमेरिकी इलाकों में परमाणु संयंत्रों की तुलना में डेटा सेंटर अधिक दिखाई देंगे। यही वजह है कि नवंबर में होने वाले चुनावों में मतदाता गवर्नर पद के उम्मीदवारों से इस मुद्दे पर उनका रुख पूछ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विरोध अभी शुरुआती दौर में है। अमेरिका में एआई फिलहाल प्रमुख चुनावी मुद्दों में नीचे है, लेकिन डेटा सेंटरों को लेकर बढ़ती बहस बताती है कि आने वाले वर्षों में यह बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है। कई अमेरिकी अपने इलाके में डेटासेंटर के बजाय परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जाने को बेहतर विकल्प मान रहे हैं। डेटा सेंटरों से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक सवाल पूरी तरह निराधार नहीं हैं। एआई उद्योग के कई प्रमुख लंबे समय से नौकरियों पर खतरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संभावित जोखिमों की चेतावनी देते रहे हैं। विरोध करने वालों का मानना है कि वे पर्यावरण, रोजगार और मानव हितों की रक्षा कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि अत्यधिक विरोध तकनीकी प्रगति को नुकसान पहुंचा सकता है। एआई से उत्पादकता बढ़ाने, नई दवाएं और इलाज विकसित करने, शिक्षा तथा ग्रीन टेक्नोलॉजी में सुधार की बड़ी संभावनाएं जुड़ी हैं। यदि पश्चिमी देश जनविरोध के दबाव में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को सीमित करते हैं, तो इससे तकनीकी नेतृत्व, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त कमजोर पड़ सकती है, जिसका लाभ चीन जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को मिल सकता है। एआई मॉडल्स के मूल्य इंसानों से अलग इकोनॉमिस्ट ने एआई मॉडलों की सोच पर एक रिसर्च की है। ओपनएआई के चैटजीपीटी मॉडल धरती पर किसी अन्य देश के मुकाबले अधिक धर्म निरपेक्ष हैं। गूूगल जेमिनाई के मॉडल किसी भी देश के लोगों की तुलना में निजी आजादी को ज्यादा महत्व देते हैं। किसी भी मॉडल ने दुनिया के मामले में अधिकतर अफ्रीकी और मुस्लिम देशों की सोच को जाहिर नहीं किया है। दरअसल एआई अपनी ट्रेनिंग में फीड किए गए डेटा के आधार पर अपनी सोच बनाते हैं। चीन के डेटा पर प्रशिक्षित मॉडल चीनी सरकार के विचारों को जाहिर करते हैं। इस साल के पहले तीन महीनों में बीस प्रोजेक्ट रद्द एआई प्रोजेक्ट्स पर जनविरोध का असर पड़ा है। 2026 के पहले तीन महीनों में 3.5 गीगावाट बिजली का संभावित उपयोग करने वाले 3.96 लाख करोड़ रु. के बीस डेटा सेंटर प्रोजेक्ट रद्द कर दिए गए हैं। पिछले तीन वर्षों में अमेजन, मेटा के प्रस्तावित छोटे सेंटरों सहित 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक के प्रोजेक्ट रद्द किए जा चुके हैं। सेडार रैपिड्स, आयोवा के निवासी वहां गूगल के प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। मिशिगन में कई शहरों ने डेटा सेंटरों का विरोध किया है। इन 4 बिंदुओं पर फोकस बढ़ाने से कम होगा विरोध एआई की बढ़त को बनाए रखने के लिए पश्चिमी देशों के राजनेताओं और एआई कंपनियों को चार बिंदुओं पर खासतौर पर ध्यान देना होगा। 1. लोगों को लगना चाहिए कि एआई की तरक्की में उनका भी फायदा है। 2. एआई से साइबर हमलों, जैविक आतंकवाद और अन्य नुकसान को दूर करने के उपाय जरूरी। 3. जॉब जाने, बिजली बिल बढ़ने और डेटा सेंटरों में पानी के अधिक उपयोग पर बनी गलत धारणाओं को दूर करने के सुझाव। 4. सरकारी कामकाज की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए एआई का उपयोग किया जाए।

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