नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने कहा कि किसी ने भी नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी त्रासदी आएगी. उन्होंने बताया कि आपदा के तुरंत बाद भारतीय दूतावास ने नेपाल में काम कर रही विभिन्न ट्रैवल एजेंसियों और कंपनियों से संपर्क करना शुरू कर दिया था. विशेष रूप से अपर त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के प्रबंधन से भी बात की गई, ताकि यह जानकारी जुटाई जा सके कि वहां कितने भारतीय मौजूद हैं, वे सुरक्षित हैं या नहीं और कितने लोग फंसे हुए हैं. राजदूत ने कहा कि देर दोपहर तक मिली जानकारी के अनुसार, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उस मार्ग का उपयोग करने वाले कई भारतीय नागरिक प्रभावित क्षेत्र में फंसे हुए. इसके अलावा कुछ कंपनियों के कर्मचारी भी वहां फंसे होने की सूचना मिली थी.

