49 साल बाद अगर किसी केस का फैसला आए, तो उसे क्या कहेंगे और वो भी चोरी के मामले में! ऐसे में मन में सवाल उठता है कि न्याय व्यवस्था आखिर इतना धीरे क्यों चल रही है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1977 में मात्र 300 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए चकबंदी लेखपाल (महेश चंद) की एक साल की जेल की सजा को 49 साल बाद पूरी तरह बरकरार रखा है. इससे पहले 1985 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. हालांकि, आरोपी ने इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां यह अपील करीब 41 वर्षों तक लंबित रही.


