दुनिया में दो तरह के मां-बाप होते हैं :
एक जो अपने बच्चों की हरकतों से ‘अनजान’ हैं। और दूसरे, जो अपने बच्चों की हरकतों से ‘परेशान’ हैं। मेरा इशारा है उन ‘बच्चों’ की तरफ है, जो नाक-नक्श और कानून के हिसाब से तो बालिग हो गए हैं। लेकिन मां-बाप की नजर में अब भी ‘बच्चे’ हैं। और शायद हमेशा रहेंगे।
सब को पता है आजकल लड़के-लड़कियां डेटिंग ऐप्स पर प्रोफाइल बनाते हैं, एक-दूसरे से मिलते हैं, लेकिन ‘अनजान’ कैटेगरी वाले मां-बाप सोचते हैं- करते होंगे, मेरा पप्पू ऐसा नहीं। जब वो अपने लाडले से पूछते हैं तो झट जवाब मिलता है, नहीं तो। मैं इन लफड़ों में नहीं पड़ता।
पप्पू जानता है कि उसकी मां सच सुन नहीं पाएंगी। असल में वो हर महीने किसी नई लड़की के साथ डेट पर जाता है, लेकिन अगर घर में पता चल गया तो रोज किट-किट होगी। जब भी वो घर से निकलेगा, मां शक की नजर से देखेगी। जब घर लौटेगा, तो पूछताछ होगी। इसलिए बेहतर है, झूठ बोलना। हां, झूठ बोलकर भी सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। आजकल मम्मी भी तो सोशल मीडिया पर उतर गई हैं। इसलिए, एक ‘सात्विक’ अकाउंट है- चाची-बुआ-दीदी टाइप के लोगों की नजरों के लिए। कि देखो, मैं कितना अच्छा बच्चा हूं।
और दूसरा अकाउंट है प्राइवेट, सिर्फ अपने खास वालों के लिए। इस अकाउंट में उसका असली रूप दिखता है- ‘हां, मुझे यह सब पसंद है पर आपकी नजरों में गंद है। तो क्या आपके पुराने खयालात की वजह से अपनी लाइफ बर्बाद कर दूं?’ और अगर पप्पू नहीं पम्मी हो, तब तो और भी मुसीबत। लड़कों का छिछोरापन तो मां-बाप बर्दाश्त कर भी लें, लेकिन लड़कियों का कैसे? इसलिए वहां तो सच कहने-सुनने का सवाल पैदा ही नहीं होता। नमस्ते अंकल, नमस्ते आंटी करते हुए वो चली किसी से मिलने कैफे में। वैसे ऐसा नहीं है कि मां-बाप ने अपनी जवानी में बिल्कुल भी इश्क नहीं लड़ाया। शायद वो भी किसी को पसंद करते थे कॉलेज में, लेकिन इजहार नहीं कर पाए। या फिर थोड़े दिन चक्कर भी चला पर किसी अंजाम पर पहुंच नहीं पाया। लेकिन रोमांस हुआ भी तो एक से या दो से। किसी का प्यार पाना पहले बहुत दुर्लभ था। अब क्या? डेटिंग एप पर जाओ, फोटो चिपकाओ और दुनिया भर की चॉइस। सिर्फ उंगलियां चलानी पड़ती हैं। प्रोफाइल में तो आप कुछ भी लिख सकते हैं, सो लिख देते हैं। जब मिले तो पता चला कि स्वीटी 5 फीट 6 इंच नहीं, 5 फीट की ही है। और सनी की फोटो तो ठीक थी, लेकिन नहाता नहीं है। उफ। कोई नहीं, कल फिर ट्राय करेंगे!
बाय चांस दो लोग ‘क्लिक’ हो भी गए, तो कुछ ही दिनों बाद उनमें से एक को डाउट होता है कि क्या यह मेरे लिए ठीक है? क्योंकि एक-दूसरे को थोड़ा जानने के बाद उसकी खामियां नजर आने लगती हैं। तो चलो, एक बार फिर उंगलियों का खेल शुरू- राइट स्वाइप, लेफ्ट स्वाइप- ‘हाय, हाऊ आर यू?’
मैं ऐसी मां हूं, जिससे अपनी बालिग बेटी की कोई बात छुपी नहीं। शुरू से मैंने उसे कहा था- जो भी हो, डरना नहीं, मुझे बता देना। इसलिए मुझे अपनी बेटी और उसके फ्रेंड्स ग्रुप की डेटिंग लाइफ की काफी जानकारी है। जरूरत से ज्यादा जानकारी!
और इसीलिए मैं कहती हूं कि जो मां-बाप सच जानते हैं, वो ‘परेशान’ होते हैं। परेशानी यह कि लड़के-लड़कियां आज इतने डरते क्यों हैं, एक-दूसरे को कमिटमेंट देने में मरते क्यों हैं? कोई ऐश्वर्या तो तुम्हें मिलने वाली नहीं, और मिल भी गई तो कहानी वही।
हर इंसान में होती हैं कुछ कमियां, बस समझ हो लड़का-लड़की के दरमियां। आजकल मान के चलो शादी से पहले डेट सब करते हैं। और जो कहते हैं- ‘नहीं’, बस आपसे डरते हैं। सच कड़वा लग सकता है मगर झूठ से सस्ता है। क्योंकि प्यार में पागल बच्चा कुछ भी कर सकता है। आपको उसके आचरण से धक्का लगा, तो वही सही। कम से कम किसी निर्दोष को धक्का लगे नहीं! मैं ऐसी मां हूं, जिससे अपनी बालिग बेटी की कोई बात छुपी नहीं। शुरू से मैंने उसे कहा था- जो भी हो, डरना नहीं, मुझे बता देना। इसलिए मुझे अपनी बेटी और उसके फ्रेंड्स ग्रुप की डेटिंग लाइफ की काफी जानकारी है। जरूरत से ज्यादा जानकारी!
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)



