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नीरजा चौधरी का कॉलम:परिसीमन के इर्द-गिर्द ही घूम रही है भाजपा की राजनीति

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मानसून सत्र का फोकस परिसीमन विधेयक पर ही रहने वाला था। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र से पहले चर्चाएं थीं कि टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) में विभाजन के बाद सत्तारूढ़ एनडीए संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के बेहद करीब पहुंच गया है। बंगाल में मिली जीत से उत्साहित भाजपा को उम्मीद थी कि वह महिला आरक्षण विधेयक और उससे जुड़े परिसीमन विधेयक को पारित करा लेगी, जिसे इसी साल अप्रैल में खारिज कर दिया गया था। वहीं विपक्ष के कई नेताओं को आशंका थी कि भाजपा इस ‘डी’ (डीलिमिटेशन) विधेयक को जल्दबाजी में पारित कराना चाहती है, ताकि निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के जरिए 2029 में वह चौथी बार सत्ता में लौट सके। टीएमसी और शिवसेना में विभाजन के बाद एनडीए को लोकसभा के 26 अतिरिक्त सांसदों का समर्थन मिल गया था। इसके बाद भाजपा के रणनीतिकार डीएमके के साथ ‘ट्रैक-2’ बातचीत कर रहे थे। डीएमके के लोकसभा में 22 सदस्य हैं और कांग्रेस द्वारा डीएमके से गठबंधन समाप्त कर टीवी के का समर्थन करने के बाद से वह इंडिया गठबंधन से अलग हो गई थी। लोकसभा में 8 सांसदों वाली एनसीपी (एसपी) भी संशोधित ‘डी’ विधेयक का समर्थन करने की ओर झुकती दिख रही थी। लेकिन छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बाद ये दोनों दल असमंजस में पड़ गए और उन्होंने कहा कि वे पहले विधेयक की विषयवस्तु देखेंगे। उनके बदले हुए रुख की वजह समझना मुश्किल नहीं है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने राजनीतिक विमर्श को अपने कब्जे में ले लिया है। दिल्ली के बाद झारखंड के छात्रों ने भी लाठीचार्ज और पानी की बौछारों का सामना करते हुए विधानसभा तक मार्च किया। बिहार के छात्र भी आंदोलन की राह पर हैं। प्रयागराज में भी राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली। इससे सत्तारूढ़ भाजपा को चिंता होनी चाहिए, क्योंकि यूपी चुनाव अब कुछ ही महीने दूर है और राज्य की आबादी में जेन-जी की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है। कांग्रेस ने अपना ध्यान गृह मंत्री पर केंद्रित किया और उनके इस्तीफे की मांग की। गृह मंत्री के सदन में नहीं आने की आलोचना करते हुए कांग्रेस ने पहले मांग की कि वे इस पर बयान दें कि छात्रों पर लाठियां और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। जब गृह मंत्री बयान देने के लिए तैयार हुए, तब राहुल गांधी ने कहा कि वे इसे सुनना ही नहीं चाहते। कांग्रेस ने शायद यह आकलन किया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बलप्रयोग ने गृह मंत्री की छवि को कमजोर कर दिया है। उनके सदन में नहीं आने से यह धारणा और मजबूत हुई कि वे रक्षात्मक स्थिति में हैं। कांग्रेस नहीं चाहती थी कि यह धारणा कमजोर पड़े। लेकिन भाजपा ने सत्र के आखिरी सप्ताह में ‘डी’ विधेयक के समर्थन में लामबंदी के अपने प्रयास फिर तेज कर दिए। प्रधानमंत्री ने 10 अगस्त को एनसीपी (एसपी) के सभी 8 सांसदों से मुलाकात की। विपक्ष को शांत करने के लिए भाजपा ने एफसीआरए विधेयक पर भी लचीला रुख अपनाने की इच्छा जताई और इसे व्यापक चर्चा के लिए जेपीसी को भेजने पर सहमति व्यक्त की। लेकिन अब सरकार परिसीमन संबंधी कानून पर विचार के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के बारे में सोच रही है। संशोधित विधेयक के प्रावधानों को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन डीएमके और एनसीपी (एसपी) जैसे संभावित समर्थकों के साथ उन पर चर्चा की गई है। इनमें सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव भी शामिल है, जिस पर इन दलों ने जोर दिया था। लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इससे महिलाओं को 33 प्रतिशत सीटें दी जा सकेंगी। दिल्ली के सत्ता गलियारों में इस संभावना की चर्चा है कि डीएमके परिसीमन विधेयक पर मतदान के दौरान अनुपस्थित रहकर अप्रत्यक्ष रूप से इसका समर्थन कर सकती है। भाजपा झामुमो और वाईएसआर कांग्रेस से भी चर्चा कर रही है। लेकिन इसके बावजूद भाजपा को इसे बिना किसी अड़चन के पारित कराने का भरोसा हासिल करने के लिए और प्रयास करने होंगे।
(ये लेखिका के अपने विचार हैं)

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