भारत दुनिया से कह रहा है कि अगर बुद्ध को समझना है तो उनकी भूमि पर आइए, भारत में आइए. ऐसे में सवाल ये आता है कि बुद्ध की जन्मभूमि नेपाल के लुम्बिनी में ₹19,000 करोड़ का भारी भरकम निवेश करने के पीछे चीन की असली मंशा क्या है? जानकारों का मानना है कि तिब्बत, दलाई लामा के उत्तराधिकार और बौद्ध संस्थानों पर प्रभाव के जरिए चीन आसिया में अपनी सांस्कृतिक और कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने की तिराक में है. वो दलाई लामा के बाद वाला गेम प्लान बना रहा है. गेम ये की दलाई लामा के बाद भविष्य का बौद्ध धार्मिक नेतृत्व अगर चीन के प्रभाव में आता है, तो उसका असर सिर्फ तिब्बत तक सीमित नहीं रहेगा, पूरे बुद्धिस्ट वर्ल्ड पर पड़ेगा यानि ड्रैगन का इरादा धर्म का कम जियो पॉलिटिक्स का ज़्यादा है. यही वजह है की आज मठ भी रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं. चीन के इस तरह के विस्तारवाद को भारत भांप चुका है. इंडोनेशिया की यात्रा पर गए प्रधानमंत्री मोदी ने आज इंडोनेशिया की संसद को संबोधित कर जो कहा उसके मायने समझने जरूरी है. भारत दुनिया का वो देश है, जो विस्तारवाद नहीं, विकासवाद की नीति पर चलता है और इसलिए हम भारत में कहते हैं- सबका साथ सबका विकास.



