Hot Topics

जयती घोष का कॉलम:चंद महीनों के युद्ध से कई देश एक दशक पीछे चले गए हैं

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल के बार-बार शुरू होने, रुकने वाले युद्ध के तेल बाजारों पर असर पर विचार करें। हालांकि युद्ध शुरू होने के बाद से वे अत्यधिक अस्थिर रहे हैं, लेकिन उनके उतार-चढ़ाव ने मांग और आपूर्ति के बजाय बदलती धारणाओं और अपेक्षाओं को प्रतिबिम्बित किया है- जो अकसर ट्रम्प की सोशल मीडिया पोस्टों से आकार लेती हैं। निश्चित रूप से, ईरान द्वारा होर्मुज को बंद करने से वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आई। लेकिन शिपिंग की दूरी और परिवहन में देरी का मतलब था इसका प्रभाव उपभोक्ताओं और उत्पादकों को तुरंत महसूस नहीं हुआ। फिर भी, विरोधाभासी आधिकारिक घोषणाओं के बार-बार बाजार की उम्मीदों को बदलने के कारण तेल और गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव हुआ। जुलाई की शुरुआत तक, अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के बाद, क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा था- जो लगभग उस स्तर पर था, जहां यह युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी में था। लड़ाई फिर से शुरू होने पर भी अब तक कीमतों में केवल मामूली वृद्धि ही हुई है। वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद, अमेरिकी शेयर बाजारों ने अप्रैल और जून के बीच 2020 के बाद से अपनी सबसे अच्छी तिमाही दर्ज की और जुलाई की शुरुआत में बढ़ना जारी रखा। इस तेजी का नेतृत्व एआई शेयरों ने किया, जिसे इस विश्वास से बल मिला कि एआई उत्पादकता और आर्थिक विकास में अभूतपूर्व लाभ प्रदान करेगा। कुछ हद तक, यह समृद्ध देशों में आर्थिक गतिविधि पर युद्ध के अपेक्षाकृत सीमित प्रभाव को दर्शाता है। आईएमएफ विकसित अर्थव्यवस्थाओं की जीडीपी वृद्धि में मामूली मंदी का अनुमान लगाता है, जो 1.7% है। वहीं अमेरिका के 2.3% की दर से बढ़ने की उम्मीद है। ओईसीडी अर्थव्यवस्थाओं में, बेरोजगारी दर अप्रैल में 5% थी, जो फरवरी 2022 से लगभग अपरिवर्तित है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं के इस लचीलेपन का श्रेय काफी हद तक एआई और क्रिप्टोकरेंसी निवेश में हालिया उछाल को दिया जा सकता है। कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं- विशेष रूप से चीन, ताइवान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया को भी इससे लाभ हुआ है। वित्तीय बाजारों की वर्तमान आत्मसंतुष्टि इस व्यापक धारणा से और मजबूत हुई है कि दोनों पक्षों की आक्रामकता के बावजूद ईरान के साथ युद्ध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है, या यह केवल एक कम-तीव्रता वाले संघर्ष के रूप में जारी रहेगा, जो होर्मुज से आंशिक आवागमन की अनुमति देता है। फिर भी यह आत्मविश्वास युद्ध के दीर्घकालिक आर्थिक परिणामों को अनदेखा करता है। युद्धविराम के बावजूद, खाड़ी से तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर से काफी नीचे रहा। और भले ही निर्यात पूरी तरह से ठीक हो जाए, निम्न-आय वाले देश आने वाले वर्षों तक आज के ऊर्जा-संकट की लागत वहन करते रहेंगे। सबसे अधिक आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पेट्रोलियम उप-उत्पादों में उर्वरक शामिल हैं, जो कृषि के लिए महत्वपूर्ण हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन का अनुमान है कि 2026 की पहली छमाही में वैश्विक उर्वरक की कीमतों में 15-20% की वृद्धि होगी। परिणामस्वरूप, किसानों को- विशेषकर निम्न-आय वाले देशों में उर्वरक की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ सिंचाई और परिवहन के लिए ईंधन की उच्च लागत से भी जूझना होगा। खाद के उपयोग में मामूली कमी भी फसल उत्पादन में भारी गिरावट ला सकती है। विश्व बैंक का अनुमान है कि चीन और भारत को छोड़कर, विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रति व्यक्ति आय का अंतर महामारी से पहले के स्तर पर 2028 के बाद तक वापस नहीं आएगा। विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच प्रति व्यक्ति आय का अंतर महामारी से पहले के स्तर पर 2028 के बाद तक वापस नहीं आएगा। ग्लोबल साउथ के कई देशों ने युद्ध से एक पूरा दशक गंवा दिया है।
(@प्रोजेक्ट सिंडिकेट)

Tags :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

About Us

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

Email Us: info@socialblize.com

Contact: +91-7976784661

Socialblize @2026. All Rights Reserved.