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खतरे में फुटबॉलर्स का दिमाग; हेडर मारने से सिकुड़ा ब्रेन:स्टडी में खुलासा, आम लोगों की तुलना में डिप्रेशन-एंग्जायटी की आशंका 25% ज्यादा

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फुटबॉल खेलना न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहतरीन माना जाता है। लेकिन, एक नई स्टडी ने इस खूबसूरत खेल से जुड़े एक डराने वाले सच को उजागर किया है। रिसर्च में यह बात सामने आई है कि पूर्व पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ियों में अपनी मिड-लाइफ (30 से 60 वर्ष की आयु) में डिप्रेशन, एंग्जायटी (चिंता) और सोचने-समझने की क्षमता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं आम लोगों की तुलना में कहीं ज्यादा पाई जाती हैं। इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन द्वारा की गई इस अहम स्टडी के नतीजे हाल ही में अल्जाइमर एसोसिएशन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए। इस रिसर्च में 30 से 60 साल की उम्र के 124 पूर्व पेशेवर खिलाड़ियों के दिमाग का परीक्षण किया गया। इनमें मशहूर इंग्लिश प्रीमियर लीग, चैम्पियनशिप और विमंस सुपर लीग के पूर्व खिलाड़ी शामिल थे। परीक्षण के नतीजों ने सबको चौंका दिया। 31 प्रतिशत पूर्व फुटबॉलरों में गंभीर डिप्रेशन के लक्षण पाए गए। यह आंकड़ा उन सामान्य वयस्कों की तुलना में 22 प्रतिशत अधिक है, जिन्होंने कभी भी ‘कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स’ नहीं खेला। वहीं, एंग्जायटी के मामले में भी 42 फीसदी पूर्व खिलाड़ियों में इसके गंभीर लक्षण दिखे, जबकि आम लोगों में यह आंकड़ा महज 25 फीसदी था। वैज्ञानिकों ने जब इन खिलाड़ियों के दिमाग की स्कैनिंग की, तो पाया कि उनके मस्तिष्क के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में ‘ग्रे-मैटर’ का वॉल्यूम काफी कम हो गया था। मस्तिष्क का यह हिस्सा हमारी याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने, सटीक निर्णय लेने और भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए बेहद अहम होता है। खुद खिलाड़ियों ने भी स्वीकार किया कि उनकी सोचने-समझने और फैसले लेने की क्षमता गैर-फुटबॉलरों के मुकाबले कमजोर हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेडर के कारण होने वाली सिर की चोटें आगे चलकर ‘क्रॉनिक ट्रॉमैटिक एन्सेफैलोपैथी’ जैसी कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का कारण बन सकती हैं। यह बीमारी याददाश्त जाने व मानसिक संतुलन बिगड़ने को जन्म देती है। ग्लासगो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विली स्टीवर्ट के अनुसार, पूर्व फुटबॉलरों में मस्तिष्क की गंभीर बीमारियों और डिमेंशिया का खतरा आम लोगों की तुलना में साढ़े तीन गुना अधिक होता है। गॉर्डन मैक्वीन और जेफ एस्टल जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की मौत को भी सिर की इन्हीं चोटों और दिमागी बीमारी से जोड़कर देखा जा चुका है। कई देशों में बच्चों के हेडर करने पर लग रही पाबंदी इस खतरे को देखते हुए अब इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड में बच्चों के फुटबॉल में हेडर करने को सीमित कर दिया गया है। पेशेवर खिलाड़ियों के लिए भी ट्रेनिंग के दौरान हेडर कम करने के सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। साथ ही, साल 2023 में प्रभावित खिलाड़ियों और उनके परिवारों की मदद के लिए एक ‘ब्रेन हेल्थ फंड’ भी स्थापित किया गया है।

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