Hot Topics

इलेक्ट्रिक की जगह हाइब्रिड प्लेन का दौर क्यों शुरू:विमानों की भारी बैटरियां बनीं अड़चन; कम लागत और लंबी दूरी के लिए हाइब्रिड तकनीक बेहतर

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में 2.5% की हिस्सेदारी रखने वाला एविएशन सेक्टर बड़े बदलाव से गुजर रहा है। पायलट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल हो रहे पिपिस्ट्रेल के इलेक्ट्रिक प्लेन ‘वेलिस इलेक्ट्रो’ ने कम मेंटेनेंस लागत और जीरो कार्बन उत्सर्जन से उम्मीदें तो जगाई हैं, लेकिन सीमित रेंज और भारी बैटरियों की चुनौती के कारण अब इस इंडस्ट्री का मुख्य फोकस ‘हाइब्रिड टेक्नोलॉजी’ पर शिफ्ट हो रहा है। लंदन के फार्नबोरो एयर शो में आई एविएशन कंपनियों का इस नए ट्रेंड पर फोकस रहा। अमेरिकी समूह ‘टेक्स्ट्रॉन’ के स्वामित्व वाली पिपिस्ट्रेल का यह विमान आपातकालीन समय को छोड़कर अधिकतम 50 मिनट ही उड़ सकता है। सीमित रेंज के बावजूद फ्लाइंग स्कूलों के बीच इसकी मांग बढ़ रही है। ‘नेबोएयर’ जैसी कंपनियां चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क विकसित कर रही हैं। ऑटो इंडस्ट्री में हो रहे सुधारों से भविष्य में रेंज बढ़ाने के लिए इसकी बैटरियों को नए वर्जन से बदला जा सकेगा। हालांकि, बड़ी संख्या में यात्रियों को लंबी दूरी तक ले जाने के लिए बैटरियों का पर्याप्त शक्तिशाली या हल्का होना असंभव है। ऐसे में इंडस्ट्री का फोकस हाइब्रिड प्लेन की तरफ झुक रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्लेन के मुकाबले हाइब्रिड मॉडल कमर्शियल एविएशन के लिए अधिक व्यावहारिक हैं। हार्ट एयरोस्पेस और जीई-नासा जैसे दिग्गज अब टर्बोप्रॉप और इलेक्ट्रिक मोटर के संयोजन पर काम कर रहे हैं। इससे क्षेत्रीय उड़ानों में ईंधन खपत व परिचालन लागत 40% तक घट सकती है। कैलिफोर्नियाई कंपनी ने बनाया 30 सीटों वाला हाइब्रिड प्लेन – हार्ट एयरोस्पेस – कैलिफोर्निया की यह कंपनी 30 सीटों वाला हाइब्रिड विमान बना रही है। यह बैटरी पर 200 किमी और हाइब्रिड मोड में 800 किमी उड़ सकता है। इसमें सीरीज हाइब्रिड सेटअप है, जहां प्रोपेलर हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर से घूमते हैं और गैस टर्बाइन जनरेटर के रूप में बिजली देता है। ईंधन की खपत 50% तक घट सकती है। – जीई एयरोस्पेस और नासा – नासा और जीई एयरोस्पेस ने ‘फार्नबोरो इंटरनेशनल एयर शो’ के दौरान हाइब्रिड इंजन साब 340बी उड़ान का सफल प्रदर्शन किया। हालिया परीक्षणों के दौरान यह 30,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भरने वाला दुनिया का पहला हाइब्रिड इलेक्ट्रिक-पावर्ड विमान बन चुका है। वर्टिकल टेक- ऑफ और लैंडिंग करने वाले इलेक्ट्रिक क्राफ्ट अब एयर टैक्सी और हेलीकॉप्टर के विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। वर्टिकल एयरोस्पेस ने इनकी रेंज बढ़ाने के लिए हाइब्रिड मॉडल पर काम शुरू कर दिया। इलेक्ट्रिक प्लेन आपात स्थिति में ज्यादा देर नहीं उड़ सकते पारंपरिक विमान उड़ते समय ईंधन जलने से हल्के होते जाते हैं, जबकि बैटरी का वजन हमेशा एक समान बना रहता है। साथ ही, हवाई नियमों के तहत रनवे उपलब्ध न होने या डायवर्जन की स्थिति के लिए अतिरिक्त ईंधन रखना अनिवार्य है। यदि किसी छोटे पैसेंजर विमान को भी कई घंटों के लिए उड़ाना हो, तो आवश्यक बैटरी इतनी भारी होगी कि यात्रियों या सामान के लिए जगह ही नहीं बचेगी। यही इलेक्ट्रिक विमानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में उद्योग अब हाइब्रिड विमानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसमें इलेक्ट्रिक मोटर और गैस टर्बाइन इंजन दोनों का उपयोग होता है।

Tags :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

About Us

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

Email Us: info@socialblize.com

Contact: +91-7976784661

Socialblize @2026. All Rights Reserved.