हमारी गतिविधियों में ज्यादातर मौकों पर सूझ, बूझ और बोध का अभाव होता है। यह परिश्रम तो हो सकता है, लेकिन पुरुषार्थ नहीं है। यदि अपने कर्म को पुरुषार्थ बनाना है तो सूझ, जिसका संबंध बुद्धि से है; बूझ, जिसका संबंध बुद्धि और समझ दोनों से है और बोध, यानी अनुभूति और आत्मा- ये तीनों […]
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारी अपने घर लौट गए हैं, लेकिन युवाओं की परेशानियां अभी खत्म नहीं होंगी। आज के समय में भारतीय बच्चों का बचपन सबसे ज्यादा तनाव भरा और प्रतियोगिता वाला बन गया है। ‘नीट’ को ही लें। इस साल 22 लाख बच्चों ने परीक्षा दी। 5 फीसदी को एमबीबीएस की […]
जैसे कुछ प्रोडक्ट बाजार से गायब हो गए, ऐसे ही मनुष्य-जीवन के कुछ व्यवहार इन दिनों लापता हैं। उनमें से दो हैं- विनम्र शब्द और नम्र भंगिमा। जिसे देखो वो भाषा में भद्देपन, आक्रामकता को सफलता के लिए जरूरी मानता है। ओटीटी, सोशल मीडिया के कारण एक स्लैंग वाली भाषा को युवा पीढ़ी जुबान में […]