तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में 21 साल की एक मेडिकल छात्रा श्रुति लया ने सुसाइड कर लिया। NEET-UG काउंसलिंग के पहले राउंड में मेडिकल सीट नहीं मिलने से वह काफी निराश थी। उसका शव उसके घर के पास मिला है। पिछले साल NEET-UG की परीक्षा देने के बावजूद उसे मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल पाई थी। इसके बाद उसने दोबारा परीक्षा की तैयारी की और इस साल NEET-UG की परीक्षा पास कर ली। फिलहाल नीट पेपर लीक के बाद सुसाइड करने वाले छात्रों का आंकड़ा 23 हो चुका है। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम शुरू किया पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। श्रुति लया एक आईटी प्रोफेशनल की बेटी थीं। उसने 2023 में स्कूली पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए NEET की तैयारी को लेकर एक कोचिंग सेंटर में दाखिला लिया था। हाल ही में जारी NEET-UG काउंसलिंग के पहले राउंड की लिस्ट में अपना नाम नहीं देखकर वह काफी निराश हो गई थीं। बताया जा रहा है कि उस रात वह सोने चली गईं, लेकिन अगली सुबह वह घर में नहीं मिलीं। परिवार के लोगों ने घर और आसपास के इलाके में उनकी तलाश की। इसी दौरान कथित तौर पर घर के पास बने एक शेड में झूलती मिली। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया और मामला दर्ज कर आगे की जांच कर रही है। 5 सितंबर को इंडिया गेट पर फिर प्रदर्शन करेगी CJP सरकार के साथ बातचीत में किए गए वादे पूरे न होने का आरोप लगाते हुए CJP ने एक बार फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई न करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक इन वादों पर अमल नहीं हुआ। इसी के विरोध में CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन ने इस प्रदर्शन को ‘1.0’ नाम दिया है। नीट पेपर लीक के बाद अब तक 23 छात्रों ने दी जान पहला परिवार दिल्ली की अंशिका का पढ़ाई के साथ काम किया, पेपर लीक ने तोड़ा डॉक्टर बनने का सपना… दिल्ली के आजाद नगर की जेजे कॉलोनी। इतनी संकरी गलियां कि निकल पाना मुश्किल है। यहीं रहने वाली अर्चना पांडे ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उसने डायरी में लिख रखा था- ‘मैं NEET निकाल चुकी हूं। MBBS कर रही हूं। अब मेडिकल स्टूडेंट हूं।‘ NEET रद्द होने के 10 दिन बाद 14 मई को अंशिका ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका डॉक्टर बनने का सपना, सपना रह गया। हम अंशिका के घर पहुंचे। परिवार में माता-पिता, भाई-बहन और दादी हैं। पूरा परिवार 8×10 के कमरे में रहता है। पिता इंद्रधर पांडे कहते हैं, ‘बेटी पढ़ने में होशियार थी। ये उसका तीसरा अटैम्प्ट था। उसे एग्जाम क्लियर होने का पूरा भरोसा था, लेकिन पेपर लीक होने से वो टूट गई।‘ दूसरा परिवार अहमदाबाद के काहान का सरकार की तरफ से कोई मिलने नहीं आया, डेथ सर्टिफिकेट बनवाना भी मुश्किल… 17 साल का काहान पटेल 3 मई को NEET एग्जाम देकर लौटा तो पिता प्रशांत पटेल को फोन कर कहा- ’पापा आज बहुत खुश हूं। दोस्तों के साथ डिनर पर जा रहा हूं।’ काहान अहमदाबाद में NEET की तैयारी कर रहा था। पिता ने पूछा, ‘सूरत कब आओगे?‘ जवाब मिला, ‘पापा, अभी नहीं… बाद में बताऊंगा।‘ उसे इस बार पूरा भरोसा था कि उसका डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो जाएगा। एग्जाम देकर लौटने के बाद उसने अपनी सारी किताबें जूनियर्स को दे दी थीं। पिता प्रशांत बताते हैं, ‘काहान बचपन से पढ़ने में तेज था। चौथी क्लास तक सूरत में पढ़ा और लगातार टॉप आता रहा। नौवीं में अहमदाबाद आया। 10वीं के बाद उसने बायोलॉजी लेकर डॉक्टर बनने की इच्छा जताई। हमने समझाया कि परिवार में किसी ने साइंस नहीं पढ़ी, थोड़ी मुश्किल आएगी। उसने कहा, ‘पापा, मैं कर लूंगा और नीट की तैयारी करने लगा। मैं कहीं घूमने जाने का भी कहता, तो मना कर देता।’ तीसरा परिवार हरियाणा की सिमरन का बेटी ने खाना बनाया, साथ खाया; कुछ देर बाद जान दे दी… सिमरन के परिवार से मिलने हम हरियाणा के हिसार पहुंचे। पिता रोहतास कुमार बेटी को याद करते हुए बताते हैं, ‘21 जून की बात है। सिमरन ने रोटी-रायता बनाया और हमने साथ में खाना खाया। हम कुछ देर के लिए बाहर गए, घर लौटे तो देखा बेटी उल्टी कर रही है। अस्पताल ले जाने पर बेटी ने बताया कि उसने कीटनाशक खा लिया है। कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई।’ पिता बेटी की जीती हुई ट्रॉफियां दिखाते हुए कहते हैं, ‘वह हमेशा टॉप करती थी। उसने BSc एग्रीकल्चर में एडमिशन लिया था। कई दूसरे एग्जाम भी निकाले थे। वो कहती थी कि मैं ये एग्जाम देकर अपनी मेंटल एबिलिटी चेक करती हूं। करना MBBS ही है।‘ रोहतास कहते हैं, ‘उसका सपना, मेरा भी सपना बन गया था, लेकिन पेपर लीक ने सिर्फ मेरी बेटी का नहीं, पूरे परिवार का सपना छीन लिया।‘ मुआवजा के बारे में पूछे जाने पर वे कहते हैं, ‘सरकार ने अब तक संपर्क नहीं किया।‘ नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में 13,892 स्टूडेंट्स सुसाइड कर चुके हैं। ये आंकड़ा पिछले दस सालों में सबसे ज्यादा है। 2023 में हुई आत्महत्याओं में 8.1% स्टूडेंट्स ने की थी। ‘बच्चों को फेलियर हैंडल करना सिखाते ही नहीं’ MP सुसाइड प्रिवेंशन टास्क फोर्स के मेंबर और साइकैट्रिस्ट डॉ सत्यकांत त्रिवेदी ने कोटा में हो रहे स्टूडेंट सुसाइड को लेकर कहा, ‘किसी भी आत्महत्या का कोई एक कारण नहीं होता। वही एग्जाम सभी बच्चे दे रहे होते हैं। ऐसे में सुसाइड के लिए मिले-जुले फैक्टर्स जिम्मेदार होते हैं। इसमें जेनेटिक्स कारण, सामाजिक कारण, पियर प्रेशर, माता-पिता के एक्स्पेक्टेशंस, शिक्षा तंत्र सब शामिल है।’ डॉ त्रिवेदी कहते हैं कि कहीं न कहीं हम बच्चों को ये सिखाने में नाकामयाब हो जाते हैं कि स्ट्रेस, रिजेक्शन या फेलियर से कैसे डील करना है। आज बच्चा ये मानने लगा है कि उसका एकेडमिक अचीवमेंट उसके एग्जिस्टेंस से भी बड़ा है। बच्चा तैयारी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, जीवन छोड़ने के लिए तैयार है। सोसाइटी ने प्रतियोगी परीक्षाओं को बहुत ज्यादा महिमामंडित कर दिया है जिसकी वजह से बच्चा ये महसूस करता है कि मैं पूर्ण तभी हो सकूंगा जब कोई एग्जाम क्रैक कर लूंगा। कोई एग्जाम 14-16 लाख स्टूडेंट्स दे रहे हैं लेकिन सीट्स सिर्फ कुछ हजार हैं। ऐसे में सब जानते हैं कि इसमें सिलेक्शन ना होने वाले बच्चों का नंबर ज्यादा रहेगा। लेकिन फेलियर से डील करने के लिए बच्चों को कोई तैयार करता ही नहीं है। बाल सभा में मोटीवेशन लेक्चर लगा देने से, काउंसलर लगा देने से, कोई मूवी दिखा देने से कुछ नहीं होगा। पूरे सिस्टम पर काम करना होगा। कॉपीकैट इफेक्ट के चलते बढ़ जाते हैं सुसाइड डॉ त्रिवेदी ने लगातार होती सुसाइड के पीछे एक वजह बर्थर इफेक्ट को भी कहा। इसका मतलब है कॉपीकैट सुसाइड। इसमें एक पर्टिकुलर कॉज की वजह से किसी का सुसाइड ग्लोरिफाई किया जाता है। उसी कॉज को झेल रहे दूसरे लोग भी प्रभावित होकर सुसाइड कर सकते हैं। वो कहते हैं कि यही वजह है कि सुसाइड का प्रचार-प्रसार बहुत संवेदनशीलता के साथ होना चाहिए। जैसे हम हेडिंग में लिखते हैं- वो रोता रहा, किसी ने एक न सुनी, पढ़ाई के प्रेशर में आकर बच्चे की गई जान….। इसमें बच्चे को हमने पीछे कर दिया और पढ़ाई के प्रेशर को आगे। ऐसे में पढ़ाई का प्रेशर झेल रहे बच्चे को लगेगा कि वाह ये तो अच्छा बचाव है। इस वजह से बच्चे में सुसाइड का विचार आ सकता है। नोट- अगर आप या आपका कोई करीबी भावनात्मक परेशानी से जूझ रहा है या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हैं, तो 24 घंटे यहां मदद उपलब्ध है। मानस हेल्पलाइन- 14416 या 1-800-89-14416 पर कॉल करें। किसी आपात स्थिति में तुरंत 112 पर संपर्क करें। ————————– 1- झोपड़ी में चल रहा था सरकारी स्कूल:DM अचानक पहुंचे तो छप्पर के नीचे जमीन पर बैठे मिले छात्र बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी गांव में प्राथमिक विद्यालय एक झोपड़ी में चल रहा रहा था। हाल ही के दिनों में इस स्कूल की एक तस्वीर भी सामने आई थी। दरअसल ये स्कूल बेनीपट्टी प्रखंड की अड़ेर दक्षिणी पंचायत का प्राथमिक विद्यालय है, जिसकी बिल्डिंग का काम चल रहा है और बच्चे छप्पर में पढ़ रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें.. 2- हिमाचल प्रदेश में एडमिशन फॉर्म में जाति का कॉलम हटेगा:सरकारी स्कूलों में जातिगत भेदभाव खत्म करने की पहल, सेशन 2027-28 से लागू 27 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सुक्खू ने अगले सेशन 2027-28 से स्कूलों में एडमिशन फॉर्म से जाति का कॉलम हटा दिया जाए। सीएम सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति कल्याण बोर्ड (HPSCWB) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जाति कॉलम हटाने की बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें
NEET-UG छात्रा ने सुसाइड किया शेड से लटकी मिली:काउंसलिंग राउन्ड में नहीं आया था नाम, अब तक देशभर में 23 NEET एस्पिरेंट्स ने जान दी

