भाषा एक घर है। चाहे उसे कुछ लोग कुटिया कहें या कोठी। रहने वालों के लिए वह एक शरण है, जिसमें हमारे जज्बों को, विचारों को अभिव्यक्ति का सामान मिलता है। अगर कुछ सामान उसमें न हो तो हम दूसरी भाषाओं से ले आते हैं और उनको लौटाते नहीं, अपने घर में जोड़ लेते हैं। […]
सभी लोग, जिनकी स्मृतियां थोड़ी ताजी हैं, जब स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें याद होगा कि वो किस श्रेणी में थे। तो जो लोग उस समय बहुत तेज दिमाग थे, फ्रंट लाइन पर बैठते थे, पता लगाएं वो आज कहां हैं और जिन्हें क्लास में कोई पूछता भी नहीं था, वो कहां हैं? एक […]
मेरे लिए साढ़े चार दशक पहले, डोंबिवली से वीटी (अब सीएसएमटी) का मुंबई लोकल ट्रेन का सफर सालों-साल एक आध्यात्मिक यात्रा जैसा रहा। वजह थी ट्रेन के डिब्बे में भजन गाने वाली मंडलियां। मेरी मां खास तौर पर कुछ स्नैक्स पैक करके देती थीं, जिन्हें नैवेद्यम् मानकर पहले भगवान को चढ़ाते और फिर सबमें बांटते […]