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Category: Opinion

एन. रघुरामन का कॉलम:क्या मोबाइल ने इमरजेंसी में हमारी प्रतिक्रिया को बदल दिया है?

मेरे लिए साढ़े चार दशक पहले, डोंबिवली से वीटी (अब सीएसएमटी) का मुंबई लोकल ट्रेन का सफर सालों-साल एक आध्यात्मिक यात्रा जैसा रहा। वजह थी ट्रेन के डिब्बे में भजन गाने वाली मंडलियां। मेरी मां खास तौर पर कुछ स्नैक्स पैक करके देती थीं, जिन्हें नैवेद्यम् मानकर पहले भगवान को चढ़ाते और फिर सबमें बांटते […]
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थॉमस एल. फ्रीडमैन का कॉलम:अपने सहयोगियों को मुश्किल में फंसाकर चलते बने हैं ट्रम्प

निश्चित रूप से अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में कुछ ऐसा रहा होगा, जो अमेरिका के रियल-एस्टेट कारोबारी राष्ट्रपति को जाना-पहचाना लगा होगा। आखिरकार, यह किसी रियल-एस्टेट बैंक्रप्सी आवेदन जैसा ही लगता है- वित्तीय आत्मसमर्पण का एक दस्तावेज। यह इस बात का भी संकेत है कि ईरान ने ट्रम्प को किस हद तक […]
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राजदीप सरदेसाई का कॉलम:अब हमारे नेताओं को ‘लोग क्या कहेंगे’ का डर नहीं सताता?

वैसी छवियां एक जमाने में राजनेताओं के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकती थीं। दिल्ली में तृणमूल के सांसदों के पाला बदलने की तैयारी के दौरान उन्हें वरिष्ठ भाजपा नेताओं के साथ पूरी तरह से कम्फर्टेबल देखा गया। गोपनीयता बनाए रखने की कोशिश तक नहीं की गई। महाराष्ट्र में शिवसेना के बागी विधायक चार्टर्ड विमानों […]
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