Hot Topics

बुक रिव्यू- सफलता के लिए खुद को गलाना जरूरी नहीं:काम के घंटे नहीं, क्वालिटी जरूरी, प्रोडक्टिविटी बढ़ानी है तो ये किताब पढ़ें

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

किताब- स्लो प्रोडक्टिविटी (बिना थकान, सफलता की उड़ान) (न्यू यॉर्क टाइम्स बेस्टसेलर किताब का हिन्दी अनुवाद) लेखक- कैल न्यूपोर्ट अनुवाद- भुवेन्द्र त्यागी प्रकाशक- पेंगुइन प्रकाशन मूल्य- 299 रुपए ‘स्लो प्रोडक्टिविटी’ एक ऐसी किताब है, जो काम और सफलता को देखने का हमारा नजरिया बदल सकती है। लेखक कैल न्यूपोर्ट ने लिखा है कि सिर्फ ज्यादा काम करने या हर समय व्यस्त रहने से ही सफलता नहीं मिलती है। असली मायने इस बात के हैं कि हम कौन-सा काम कर रहे हैं और उसे कितनी गुणवत्ता के साथ पूरा कर रहे हैं। यही विचार इस किताब का आधार है। किताब में क्या है? कैल न्यूपोर्ट ‘जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी’ में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर हैं। किताब में वे बताते हैं कि आज का वर्कप्लेस हमें लगातार काम में व्यस्त रहने के लिए प्रेरित करता है। मीटिंग्स, ईमेल, मैसेज और कभी खत्म न होने वाली टू-डू लिस्ट के बीच हम यह भूल जाते हैं कि किसी काम की असली कीमत उसकी क्वालिटी होती है। लेखक का तर्क है कि अगर हम कम, लेकिन जरूरी काम चुनें, उन्हें धैर्य से करें, लगातार भागने की बजाय अपनी रफ्तार तय करें, तो बेहतर नतीजे मिलेंगे। इससे मानसिक थकान भी कम होगी। ग्राफिक में किताब की 10 जरूरी बातें देखिए- यह किताब समझाती है कि किन कामों को प्राथमिकता देनी चाहिए, उन्हें किस तरह पूरा करना चाहिए और ऐसा करना क्यों जरूरी है। लेखक का मानना है कि काम करने की रफ्तार धीमी हो सकती है, लेकिन उसके नतीजे मजबूत और टिकाऊ होने चाहिए। किताब की सबसे असरदार बात किताब की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह ‘स्लो’ शब्द को आलस्य से नहीं जोड़ती। लेखक साफ करते हैं कि स्लो प्रोडक्टिविटी का मतलब सोच-समझकर मेहनत करना है। किताब पढ़ते हुए महसूस होता है कि यह टाइम मैनेजमेंट से ज्यादा अटेंशन मैनेजमेंट की बात करती है। किताब का सार कैल न्यूपोर्ट का मानना है कि दिमागी काम में सफलता इस बात से तय नहीं होती कि आपने दिन भर में कितने काम निपटाए, बल्कि इस बात से होती है कि आपने सबसे महत्वपूर्ण काम को कितनी गहराई से किया। वे कहते हैं कि हमें बिजी कल्चर से बाहर निकलकर ऐसे काम चुनने चाहिए, जिनका लंबे समय तक असर रहे। यही ‘स्लो प्रोडक्टिविटी’ का मूल विचार है। ग्राफिक में स्मार्ट काम करने के तरीके देखिए- किताब की सबसे दिलचस्प बात किताब में लेखक इस सिद्धांत को उदाहरणों के जरिए समझाते हैं। यही वजह है कि सेल्फ-हेल्प बुक होने के बावजूद यह बोझिल नहीं लगती। वे अमेरिकन लेखक और पत्रकार जॉन मैकपी का उदाहरण देते हुए इस बात को समझाते हैं। वे मैकपी के बारे में बताते हैं कि घंटों पेड़ के नीचे बैठकर सिर्फ सोचा करते थे। फिर वे लिखते हैं कि उनका इस तरह पेड़ के नीचे बैठना पहली नजर में समय की बर्बादी लग सकता है, लेकिन इसी अभ्यास ने उन्हें कई यादगार लेख लिखने में मदद की। इसी तरह लेखक ने बेंजामिन फ्रैंकलिन, जेन ऑस्टिन और गैलीलियो जैसे लोगों के उदाहरण भी दिए हैं। इनके जरिए बताया है कि महान काम जल्दबाजी में नहीं होते। ‘ओवरहेड टैक्स’ का विचार भी किताब का अहम हिस्सा है। लेखक बताते हैं कि ईमेल, मीटिंग्स और छोटे-छोटे एडमिनिस्ट्रेटिव काम इतना समय ले लेते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण काम पीछे छूट जाते हैं। वहीं ‘ऑफिस आवर्स’ जैसी स्ट्रैटेजी यह समझाती है कि छोटी-छोटी रुकावटों को सीमित करके काम की क्वालिटी कैसे बढ़ाई जा सकती है। भाषा और लिखने का ढंग कैल न्यूपोर्ट की भाषा सरल, स्पष्ट और बातचीत जैसी है। वे तर्क, रिसर्च और उदाहरणों के जरिए अपनी बात रखते हैं। इसी कारण किताब पढ़ते हुए ऐसा नहीं लगता कि लेखक कोई फार्मूला बेच रहे हैं। कई जगह रिसर्च और ऐतिहासिक उदाहरण आते हैं, लेकिन वे कहानी के फ्लो को नहीं तोड़ते हैं। किताब में ग्राफिक्स या चित्र नहीं हैं। फिर भी चैप्टर्स का सही क्रम और इसका छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजन पढ़ने का अनुभव सहज बनाए रखता है। किताब की खूबियां किताब की कमियां यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए? किताब सफलता को देखने का नजरिया बदलती है। यह बताती है कि हर समय व्यस्त रहना उपलब्धि नहीं है। अगर हम कम लेकिन महत्वपूर्ण कामों पर ध्यान दें, अपनी गति बनाए रखें और मानसिक थकान से बचें, तो लंबे समय में बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। यह किताब किन्हें पढ़नी चाहिए, ग्राफिक में देखिए- मौजूदा समय में प्रासंगिक है यह किताब मौजूदा वक्त में काम के घंटे बढ़ गए हैं, डिजिटल नोटिफिकेशन कभी खत्म नहीं हाेते हैं। साथ ही ‘हमेशा उपलब्ध रहने’ का दबाव लगातार बना रहता है। ऐसे में यह किताब पहले से ज्यादा प्रासंगिक हो जाती है। यह याद दिलाती है कि काम की असली सफलता उसके प्रभाव में छिपी होती है। यही वजह है कि यह किताब प्रोडक्टिविटी के साथ बेहतर और संतुलित जीवन पर भी सुंदर और जरूरी सबक सिखाती है। ……………………………………… ये खबर भी पढ़ें… बुक रिव्यू- किताबों के रास्ते खुद को खोजने की कहानी:आम जिंदगियों का खास दस्तावेज, यह किताब पढ़ने के लिए नहीं, जीने के लिए है हर इंसान की जिंदगी में एक ऐसा दौर आता है, जब उसे लगता है कि वह देर कर चुका है। सही नौकरी का मौका निकल गया, अब शायद कुछ नया नहीं होगा। मिचिको आओयामा की किताब ‘आप जो ढूंढ़ रहे हैं वह मिलेगा लाइब्रेरी में’ ऐसे ही लोगों की कहानी है। पूरी खबर पढ़ें…

Tags :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

About Us

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

Email Us: info@socialblize.com

Contact: +91-7976784661

Socialblize @2026. All Rights Reserved.