भारतीय क्रिकेट के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या आज करोड़ों प्रशंसकों के चहेते हैं, लेकिन जीवन में बड़े संघर्षों से गुजर कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। फिलहाल उनकी नई फ्रेंचाइजी में जाने की चर्चाएं जोरों पर हैं। जानते हैं संघर्ष से सफलता की उनकी कहानी… वडोदरा के छोटे-मोटे मैदानों में खेल कर टीम इंडिया के सितारे बने हार्दिक का जन्म 11 अक्टूबर 1993 को सूरत के चौरियासी में हुआ था। उनके पिता कार फाइनेंस का व्यवसाय करते थे। हार्दिक और उनके भाई क्रुणाल का कॅरिअर क्रिकेट में बनाने के लिए परिवार वडोदरा शिफ्ट हो गया। वडोदरा में पिता को दिल का दौरा पड़ गया। उनकी गिरती सेहत के कारण आमदनी ठप हुई तो परिवार को गहरी आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ा। संघर्ष : एक मैच के सिर्फ 400 रु. मिलते, सर्जरी भी बनी बाधा एक वक्त ऐसा भी था, जब हार्दिक के पास स्कूल फीस चुकाने के पैसे भी नहीं होते थे। उन्होंने नौवीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया। दोनों भाई लोकल क्लब्स के लिए गांवों में क्रिकेट खेलने जाते थे, जहां उन्हें 400 रुपए मिलते थे। कई बार दोनों वक्त मैगी खाकर पेट भरना पड़ता था। क्रिकेट किट खरीदने के भी पैसे नहीं थे तो उधार की किट लेकर खेलते। हार्दिक सेहत की समस्याओं से भी जूझते रहे। 2019 में लंदन में बड़ी स्पाइनल सर्जरी हुई, जिससे महीनों तक वे खेल से दूर रहे। लोग उनका कॅरिअर खतरे में मानने लगे थे। हाल ही में आईपीएल के दौरान पीठ में गंभीर एेंठन के बाद वे बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर में रिहैब कर रहे हैं। सफलता : आईपीएल जीता, दो बार विश्वविजेता टीम में रहे 2015 का साल हार्दिक का टर्निंग पॉइंट रहा। सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन को देख कर मुम्बई इंडियंस ने उन्हें आईपीएल के लिए खरीदा। जनवरी 2016 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 फॉर्मेट में डेब्यू किया। जल्द ही वे वनडे और टेस्ट टीम में भी शामिल हो गए। 2022 में गुजरात टाइटंस का कप्तान रहते हुए उन्होंने आईपीएल चैम्पियनशिप जीती। 2024 में उन्हें भारतीय टी20 और वनडे टीम का उप-कप्तान बनाया गया। हार्दिक 2024 और 2026 की टी20 वर्ल्डकप विजेता टीम में शामिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय कॅरिअर में हार्दिक 94 वनडे मैचों में 1904 और 138 टी20 मैचों में 2 हजार से ज्यादा रन बना चुके हैं। दोनों फॉर्मेट में क्रमश: 91 और 114 विकेट ले चुके है। कई मैचों के व्यक्तिगत पुरस्कार उनके नाम हैं।


