भारत की त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद को बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल मिला है। यह जोड़ी शनिवार को विमेंस डबल्स का सेमीफाइनल हार गई। उन्हें वर्ल्ड नंबर-1 जोड़ी चीन की लियू शेंग शू और टैन निंग ने 18-21, 21-13, 21-8 से हराया। नई दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में एक घंटे 11 मिनट तक चले इस मैच में भारतीय जोड़ी ने पहला गेम जीत लिया। लेकिन, बाकी को दो गेम गंवा बैठी। भारत को 15 साल बाद विमेंस डबल्स कैटेगरी में मेडल मिला है। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने ब्रॉन्ज दिलाया था। त्रिसा-गायत्री वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडल विनर क्लब में शामिल त्रिसा-गायत्री उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों के क्लब में शामिल हो गईं, जिन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप के पोडियम पर जगह बनाई है। गायत्री ने कहा, ‘उस क्लब में शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। अभी लंबा सफर बाकी है। यह सिर्फ शुरुआत है। हमें इस सफलता को आत्मविश्वास के साथ आगे ले जाना है।’ भारत लगातार 11 एडिशन से मेडल जीत रहा भारत ने 2011 से लगातार 11 वर्ल्ड चैंपियनशिप एडीशन में कम से कम एक मेडल जीता है। भारत को पहला मेडल (ब्रॉन्ज) 1983 में प्रकाश पादुकोण ने दिलाया था। एकमात्र गोल्ड पीवी सिंधु ने जीता है। अब भारत के वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल की संख्या 16 हो गई है। इनमें एक गोल्ड, 4 सिल्वर और 11 ब्रॉन्ज शामिल हैं। किसने क्या कहा? गायत्री ने कहा- ‘हम थोड़ा ज्यादा कॉन्फिडेंट थे’ गायत्री ने मैच के बाद कहा, ‘पहले गेम में हम थोड़ा ज्यादा कॉन्फिडेंट थे। दूसरे गेम में चीनियों ने बहुत धैर्य के साथ खेला। वे काफी शांत थीं। हम जल्दबाजी कर रहे थे और सिर्फ अंक लेना चाहते थे। हम अपने खेल से खुश हैं। पूरा टूर्नामेंट हमारे लिए शानदार रहा।’ त्रिसा जॉली बोली- ‘आज हमारा दिन नहीं था’ त्रिसा ने कहा, ‘आज हमारा दिन नहीं था। पहले गेम में जीतने के बाद दूसरे गेम की शुरुआत में भी हमारा कंट्रोल था। फिर प्रतिद्वंद्वियों ने रिदम हासिल कर लिया और हम खो बैठे।’ उन्होंने आगे कहा, ‘वे अंक में बढ़त बना रही थीं और हम उनकी बराबरी नहीं कर पा रहे थे। वे रैलियों के दौरान धैर्य से खेल रही थीं, जिससे उन्हें फायदा मिला।’ त्रिसा-गायत्री इस साल अब तक ज्यादा टूर्नामेंट नहीं खेल सकी थीं। त्रिसा को अप्रैल में टखने में चोट लगी थी, जिसके कारण दोनों का शेड्यूल सीमित रहा। कोच गोपीचंद ने कहा- ‘दोनों ने हमें गर्व महसूस कराया’ भारत के चीफ कोच पुलेला गोपीचंद से जब पूछा गया कि इस समय उन्हें पिता होने पर ज्यादा गर्व है या कोच होने पर, तो उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि दोनों। जब मैं कोर्ट पर होता हूं, तो मेरे अंदर का कोच सामने होता है, लेकिन बाहर पिता होता है।’ पुलेला ने कहा, ‘त्रिसा और गायत्री दोनों ने हमें गर्व महसूस कराया। उन्होंने बहुत अच्छी लड़ाई लड़ी और मैं मेडल से खुश हूं। निश्चित तौर पर मैं उन्हें फाइनल में देखना चाहता था, लेकिन उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने टॉप खिलाड़ियों को हराया है, इसलिए यह शानदार प्रदर्शन रहा।’ भारतीय जोड़ी ने एक घंटे 11 मिनट संघर्ष किया पहला गेम में भारतीय जोड़ी एक समय 16-18 से पीछे थी, लेकिन इसके बाद लगातार 5 अंक जीतकर शानदार वापसी की। उसने गेम 21-18 से अपने नाम किया। दूसरे गेम में त्रिसा-गायत्री 8-10 से पीछे चल रही थीं। फिर इंडियन पेयर ने लगातार अंक लेकर ब्रेक तक 11-10 की बढ़त ली। ब्रेक के बाद चीनियों ने वापसी की और 21-13 से गेम जीता। तीसरे गेम में चीनी खिलाड़ियों ने भारतीय जोड़ी को ज्यादा मौके नहीं दिए। उन्होंने 21-8 से गेम जीतकर फाइनल में जगह बनाई। ———————————————– रैकेट स्पोर्टस से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… सिनर घुटने की चोट के कारण यूएस ओपन से हटे, कहा- ठीक होने में और समय चाहिए वर्ल्ड नंबर 1 टेनिस खिलाड़ी जैनिक सिनर ने दाएं घुटने की चोट के कारण इस महीने होने वाले यूएस ओपन से नाम वापस ले लिया है। वे सीजन के आखिरी ग्रैंड स्लैम में नहीं खेलेंगे। पढ़ें पूरी खबर


