वंदे मातरम विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. आजादी के पर्व पर कांग्रेस मुख्यालय में जो हुआ, उस घटना को लेकर कांग्रेस पर सियासी शिकंजा कसता ही जा रहा है. मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पार्टी की कार्य समिति में पार्टी के बड़े नेताओं ने एक बड़ा फैसला किया. कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में तय किया गया कि पार्टी के कार्यक्रमों में पहले की तरह ही राष्ट्र गीत वंदे मातरम के पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे. अक्टूबर 1937 में कोलकाता में कांग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक में वंदे मातरम के पहले दो अंतरों को गाने का संकल्प किया गया था. संकल्प में महात्मा गांधी, पंडित नेहरू रविन्द्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल जैसे देश के वरिष्ठ नेताओं ने जो फैसला किया वो उसका पालन करेंगे.

