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जसपाल राणा के 50वें जन्मदिन पर मां की मौत:बेटे के जाने के 16 दिन बाद ली अंतिम सांस, पैतृक गांव चिलामू नैनबाग में हुई अंत्येष्टि

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उत्तराखंड के दिग्गज निशानेबाज और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित दिवंगत कोच जसपाल राणा के निधन के 16 दिन बाद उनकी मां श्यामा राणा का भी रविवार शाम निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से पीड़ित थीं और दिल्ली के आरआर अस्पताल में भर्ती थीं। पैतृक गांव टिहरी स्थित चिलामू नैनबाग में यमुना नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। जसपाल राणा का 12 जून को जर्मनी के म्यूनिख से लौटते समय फ्लाइट में तबीयत बिगड़ने के बाद निधन हो गया था। परिवार ने उनकी गंभीर बीमारी को देखते हुए उन्हें जसपाल राणा के निधन की जानकारी नहीं दी थी। वे अंतिम समय तक बेटे से मिलने की इच्छा जताती रहीं। 28 जून को जसपाल राणा का 50वां जन्मदिन था और उसी दिन शाम करीब आठ बजे उनकी मां ने भी अंतिम सांस ली। कुछ ही दिनों में मां-बेटे के निधन से परिवार गहरे सदमे में है। पारिवारिक मित्र मयंक मारवाह ने बताया कि श्यामा राणा के निधन की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य और करीबी दिल्ली पहुंच गए। 12 जून को हुआ था निधन, 16 को अंतिम संस्कार जसपाल राणा का 12 जून को निधन हो गया था। 49 वर्षीय राणा म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से लौटते समय फ्लाइट में तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती हुए थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। 13 जून को उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंदा स्थित मझोन गांव स्थित आवास लाया गया था, जहां अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर अपने कोच को अंतिम विदाई देते हुए भावुक हो गई थीं। सीएम पुष्कर सिंह धामी, पूर्व सीएम हरीश रावत, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण समेत कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की थी। कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में 23 पदक जीतने वाले जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे बड़े नामों में गिने जाते थे। इसके बाद 14 जून को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय सम्मान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके 21 वर्षीय बेटे युवराज राणा ने मुखाग्नि दी। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराया। उनका पार्थिव शरीर देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट से चार्टर्ड विमान के जरिए वाराणसी पहुंचाया गया था। श्रद्धांजलि सभा के बाद पार्थिव देह को राजघाट ले जाया गया और वहां से नाव के जरिए गंगा मार्ग से मणिकर्णिका घाट पहुंचाया गया। अंतिम यात्रा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह और नीरज सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने कंधा दिया। घाट पर गंगा स्नान के बाद वैदिक रीति-रिवाजों से उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। तस्वीरें देखिए- गुरु को अंतिम विदाई देते वक्त भावुक हो गई थीं मनु भाकर ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर 15 जून को अपने कोच जसपाल राणा को अंतिम विदाई देने देहरादून पहुंची थीं। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करते ही वह भावुक हो गईं और जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा से लिपटकर रो पड़ीं। मनु भाकर के करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में जसपाल राणा की अहम भूमिका रही। जूनियर स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक उन्होंने मनु का लगातार मार्गदर्शन किया। पेरिस ओलिंपिक में मनु के दो पदक जीतने के पीछे भी जसपाल राणा की कोचिंग और अनुभव को बड़ी वजह माना जाता है। पिता ITBP में रहे, बचपन में राणा को थमाई पिस्टल जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी में हुआ था। हालांकि मूल रूप से वह टिहरी के रहने वाले थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस, यानी ITBP में तैनात थे। बाद में वे उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। शूटिंग के प्रति उनका विशेष लगाव था और उन्होंने ही बेटे को महज 10 साल की उम्र में पिस्टल पकड़ा दी थी। परिवार में खेल का माहौल इतना मजबूत था कि उनकी बहन सुषमा सिंह और भाई सुभाष राणा भी राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज बने। कम उम्र से ही जसपाल का अधिकांश समय शूटिंग रेंज में बीतने लगा और यहीं से उस सफर की शुरुआत हुई जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजों की कतार में खड़ा कर दिया। राहुल गांधी से शूटिंग रेंज में शुरू हुई दोस्ती जसपाल राणा का रिश्ता सिर्फ खेल जगत तक सीमित नहीं था। उनकी राहुल गांधी के साथ साथ सीएम पुष्कर सिंह धामी के साथ ही व्यक्तिगत रिश्ते थे। कुछ परिवारिक सूत्रों की मानें तो राणा और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पहली मुलाकात भी शूटिंग रेंज में हुई थी। निशानेबाजी के साझा शौक ने दोनों को करीब लाया और बाद में राजनीति में आने के बाद भी यह रिश्ता बना रहा। 2012 में कांग्रेस में शामिल होने के बाद जसपाल राणा पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय दिखे। राहुल गांधी के साथ उनकी कई मुलाकातें और सार्वजनिक कार्यक्रम चर्चा में रहे। उनके निधन पर राहुल गांधी ने भी शोक व्यक्त करते हुए भारतीय शूटिंग में उनके योगदान को याद किया। बीजेपी से कांग्रेस तक, पिता अलग दल में रहे खेल के बाद जसपाल राणा राजनीति में भी सक्रिय हुए। 2009 में वे बीजेपी के टिकट पर टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे, हालांकि जीत नहीं सके। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। उस समय उनके पिता नारायण सिंह राणा बीजेपी में सक्रिय थे, जबकि जसपाल कांग्रेस के लिए प्रचार कर रहे थे। पिता-पुत्र की अलग-अलग राजनीतिक राह उस दौर में उत्तराखंड की चर्चित राजनीतिक कहानियों में शामिल रही। राजनाथ सिंह परिवार से भी जुड़ा था रिश्ता जसपाल राणा की बहन सुषमा सिंह की शादी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे और नोएडा विधायक पंकज सिंह से हुई है। इस रिश्ते के चलते उनका परिवार देश की प्रमुख राजनीतिक हस्तियों से भी जुड़ा रहा। खेल, राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहने वाले जसपाल राणा अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ गए हैं, जिसमें मेडल, रिकॉर्ड, शिष्य और प्रेरणा की लंबी श्रृंखला शामिल है। ———————————- ये खबर भी पढें… 49 की उम्र में थमा चैंपियन शूटर राणा का सफर:18 में अर्जुन अवॉर्ड तो 21 में मिला पद्मश्री, काशी में आखिरी इच्छा हुई पूरी उत्तराखंड में जन्मे दिग्गज शूटर, पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्डी जसपाल राणा (49) को शनिवार शाम वाराणसी में अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे युवराज (21) ने मुखाग्नि दी। परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार कराया। (पढ़ें पूरी खबर)

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