बिहार के कटिहार जिले के एक छोटे से गांव से निकली एक बच्ची आज अपने हौसले और जिद से दूसरों के लिए मिसाल बन रही है. हसनगंज प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय (Upgraded Middle School) भतौरिया में पढ़ने वाली कक्षा चार की छात्रा लक्ष्मी जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग है. लेकिन उसने अपनी शारीरिक कमी को कभी अपनी पढ़ाई के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया. पैरों से लिखते हुए वह रोज स्कूल जाती है और बड़े सपने देखती है. आर्थिक तंगी, सामाजिक चुनौतियों और संसाधनों की कमी के बीच लक्ष्मी का संघर्ष यह संदेश देता है कि अगर हौसला मजबूत हो तो परिस्थितियां भी रास्ता नहीं रोक सकतीं.

