आखिर सावन महीने का इतना महत्व क्यों है? और इसमें सोमवार का विशेष महत्व क्यों है? अगर हम कहें कहूं कि सावन के सोमवार का रहस्य सिर्फ व्रत रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक ऐसी कथा जुड़ी है जिसने पूरी सृष्टि को विनाश से बचाया था. कल्पना कीजिए, चारों ओर हाहाकार मचा हुआ है. समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पूरी सृष्टि को पल भर में समाप्त कर सकता था. देवता और दानव दोनों असहाय थे. तभी भगवान शिव आगे आए. उन्होंने अपने बारे में एक बार भी न सोचते हुए उस भयंकर विष को अपने कंठ में धारण कर लिया. विष की अग्नि इतनी प्रचंड थी कि उनका कंठ नीला पड़ गया और तभी से वे नीलकंठ कहलाए.
मान्यता है कि उस अग्नि को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव पर लगातार जल अर्पित किया. तभी से शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है. अब सवाल है कि सावन का सोमवार ही इतना खास क्यों है?
‘सोम’ का अर्थ है चंद्रमा और चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक की शोभा हैं. इसलिए सोमवार उन्हें अत्यंत प्रिय है. वहीं सावन का महीना प्रकृति, वर्षा और नई ऊर्जा का प्रतीक है. जब भगवान शिव का प्रिय महीना और प्रिय दिन एक साथ आते हैं, तो उनकी आराधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. यही कारण है कि लाखों श्रद्धालु सावन के हर सोमवार को व्रत रखते हैं, जलाभिषेक करते हैं और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हैं.

