Hot Topics

एन. रघुरामन का कॉलम:सुनिश्चित करें कि भोजन का समय हमारा वजन कम करे, याददाश्त नहीं

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

कुछ महीने पहले ओवरवेट और मोटापे से जूझ रहे बहुत सारे लोगों को रोजाना खाने में 500 कैलोरी कम लेने के लिए कहा गया। इनमें से आधे लोगों के लिए खाने का समय नौ घंटे की समय-सीमा में सीमित कर दिया गया। छह महीने बाद सभी का वजन करीब एक स्टोन-साइज कम हो गया, लेकिन जिन्होंने 9 घंटे की समय-सीमा में खाया और शाम 6 बजे तक डिनर कर लिया, उन्होंने मेमोरी और लर्निंग टेस्ट में कम गलतियां कीं। इसी सप्ताह अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की यह नई खोज उन लोगों के लिए चेतावनी है, जिनके लिए देर शाम सोफे पर बैठने का मतलब ही बिस्कुट और स्नैक्स खाना है। इंटरमिटेंट फास्टिंग नई बात नहीं है। यह चलन बन चुका है। लेकिन यह रिसर्च कहती है कि जो लोग ओएमएडी (दिन में एक बार भोजन) या 12 घंटे की फास्टिंग करते हैं, उनकी कमर का घेरा तो तेजी से घट सकता है, लेकिन उन्हें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सोने से पहले के चार घंटों में कुछ भी न खाएं, ताकि उनकी याददाश्त पर असर न पड़े। आप सोच रहे हैं कि ऐसा कैसे? तो यहां रिसचर्स की व्याख्या पेश है। जब हम खाना खाते हैं तो क्या होता है? तीन बार भोजन और नियमित स्नैक्स खाते रहने पर हमारा शरीर फूड बर्न करके ऊर्जा बनाता रहता है। खाने से ब्रेक का मतलब है कि हम आराम और ऊतकों को रिपेयर कर रहे हैं। इस प्रक्रिया को ‘ऑटोफैजी’ कहते हैं। इस दौरान इंसुलिन और ब्लड शुगर लेवल कम होता है। शरीर न केवल जमा फैट का ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल शुरू कर देता है, बल्कि कोशिकाओं के खराब प्रोटीन को हटाता है और इनएफिशियंट माइटोकॉन्ड्रिया को साफ करता है, जो कोशिकाओं के लिए ऊर्जा बनाते हैं। यह हमारे दिमाग के लिए अच्छा क्यों है? दिमाग की कोशिकाओं में भी माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं और वे ऊर्जा के लिए ग्लूकोज पर निर्भर रहते हैं। फास्टिंग से कोशिकाओं में अनुकूलन प्रक्रिया शुरू होती है, जो उन्हें अधिक एफिशियंट बनाती है। रिसर्चर्स का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ माइटोकॉन्ड्रिया कम एफिशियंट होने लगते हैं और फास्टिंग उनकी रिपेयरिंग का एक तरीका है। फास्टिंग से पुराने जमा पदार्थों की खपत होती है और नए निर्माण की जगह बनती है। इसलिए शाम को जल्दी खाना खाने से दो काम होते हैं- वेट लॉस और डिमेंशिया से दिमाग का बचाव। लेकिन जल्दी खाने और नींद का आपस में क्या संबंध है? ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित 41 से ज्यादा अध्ययनों में पाया गया कि जिन लोगों ने शाम 5 बजे से पहले आखिरी भोजन किया, उनका वजन ज्यादा घटा। उनका ब्लड शुगर कंट्रोल भी उन लोगों से बेहतर रहा, जिन्होंने शाम 7 बजे के बाद खाना खाया। रिसर्चर्स का मानना है कि भोजन का समय हमारी सर्केडियन रिदम पर असर डाल सकता है, जो हमारे बॉडी टेम्परेचर, नींद और हार्मोन स्तर को नियंत्रित करती है। सोने के ठीक पहले खाने से हमारा शरीर उसे पचाने और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की रिपेयरिंग के दो कामों में एक साथ संघर्ष करता है। दोनों में संतुलन बनाने के लिए तनाव हार्मोन्स निकलते हैं। रिसर्चर्स की सलाह है कि स्टार्ची और भारी भोजन दिन में खा लेना चाहिए, ताकि सोने से पहले शरीर उन्हें बर्न कर सके। इससे मुझे एक पुरानी कहावत याद आती है कि नाश्ता राजा की तरह, लंच राजकुमार की तरह और डिनर दरिद्र की तरह खाना चाहिए। ‘न्यूट्रिशन जर्नल’, ‘सेल मेटाबोलिज्म’, ‘ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ समेत कई रिसर्च पेपर्स, जिनमें रिसर्चर्स खाने के कई फॉर्मेट पेश करते हैं, को पढ़ने के बाद मुझे लगता है कि ये रिसर्चर्स अपनी अलग-अलग थ्योरीज में वही बता रहे हैं, जिसका पालन हमारे पूर्वज मजबूती से करते आए। फंडा यह है कि चूंकि हम इंसान डाइअर्नल जीव हैं, यानी हम दिन में खाने और रात में आराम करने के लिए बने हैं, इसलिए हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर लें, ताकि सोते समय हमारा शरीर और दिमाग खुद को रिपेयर कर सकें।

Tags :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

About Us

Socialblize is your trusted destination for the latest news, trending stories, and insightful updates from India and around the world. We are committed to delivering fast, accurate, and unbiased news that keeps you informed every day.

Email Us: info@socialblize.com

Contact: +91-7976784661

Socialblize @2026. All Rights Reserved.