ट्रंक कॉल के जमाने से लेकर आज के जूम और व्हाट्सएप कॉल के जमाने तक बहस के तरीकों में बदलाव पर चर्चा हो रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने कल सांसदों से कहा कि वे Gen Z से ‘रीच आउट’ करें. उनकी भाषा, तेवर और भाव-भंगिमा को समझें. इसी कोशिश में सत्ता पक्ष के सांसद लगे हैं. लेकिन इसमें एक खतरा भी है. Gen Z की भाषा में कई ऐसे शब्द होते हैं जो संसद में असंसदीय माने जाते हैं. इसलिए सांसदों को ध्यान रखना होगा कि जब वे Gen Z की भाषा में बात करें तो सिर्फ उन्हीं शब्दों का इस्तेमाल करें जिनकी संसद में अनुमति है.

