बच्चों के यौन शोषण के मामले में यूपी के एक जूनियर इंजीनियर और उसकी पत्नी को विशेष अदालत ने फरवरी 2026 में फांसी की सजा सुनाई थी। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इंस्टाग्राम ने भी धन लेकर रिकमेंडेशन एल्गोरिदम के माध्यम से बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को भारत में बढ़ावा दिया है। पर इस पर मुकदमा दर्ज करने के बजाय सरकार ने मेटा कम्पनी से एक सप्ताह में जवाब भर मांगा है। इस मामले से जुड़े 5 पहलुओं की समझ जरूरी है। 1. बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मई 2017 में महिला एवं बाल विकास, गृह, कानून, आईटी, विदेश और दूरसंचार मंत्रालय की अंतर-मंत्रालय समिति का गठन हुआ था। मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर के राज्यसभा में दिए जवाब के अनुसार सोशल मीडिया में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रसार पॉक्सो, आईटी और बीएनएस कानूनों के अनुसार गम्भीर अपराध है। दोषियों को सजा के लिए 774 फास्टट्रैक अदालतों का गठन हुआ है। 2. नीट में पेपर लीक रोकने के लिए टेलीग्राम पर रोक लगी थी। दिल्ली हाईकोर्ट में सरकार ने कहा था कि टेलीग्राम से नकल माफिया, आतंकवाद, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, वित्तीय धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और साइबर अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। फेसबुक, वॉट्सएप और इंस्टाग्राम के 154 करोड़ ग्राहकों वाला भारत मेटा कंपनी के लिए सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में यौन शोषण के संगठित अपराध से बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाने वाली मेटा पर भारी जुर्माने के साथ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए। 3. बच्चों के यौन शोषण और चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े मामलों में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ईयू में टेक कम्पनियों के खिलाफ आपराधिक मामलों के साथ जुर्माना वसूलने के मामले चल रहे हैं। डिजिटल अरेस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में अटाॅर्नी जनरल ने कहा था कि वॉट्सएप में सिम बाइंडिंग होने से साइबर अपराधों में कमी आएगी। लेकिन टेक कम्पनियों की लाॅबीइंग के बाद दूरसंचार मंत्रालय ने नियम पालन की समय-सीमा बढ़ा दी। फरवरी 2026 में आईटी इंटरमीडियरी नियमों में हुए बदलावों के अनुसार इंस्टाग्राम वाले मामले में 2 घंटे के भीतर कार्रवाई करने के बजाय उसे जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। 4. विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस गेब्रेयेसुस और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों ने डिजिटल जगत में बच्चों को बचाने के लिए अपील की है। दिल्ली हाईकोर्ट के 23 अगस्त 2013 के आदेश के अनुसार 13 से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया जॉइन नहीं कर सकते। 2021 में ट्विटर के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस की एफआईआर के साथ दिल्ली पुलिस का नोटिस जारी हुआ था। भारत के नियमों का पालन नहीं करने वाली टेक कंपनियों की सेफ हार्बर की सुरक्षा खत्म करने के लिए आईटी मंत्री राजीव चन्द्रशेखर ने अक्टूबर 2023 में संसद में बयान दिया था। उसके अनुसार इंस्टाग्राम के नामांकित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज होना चाहिए। 5. बांदा के इंजीनियर दम्पती को फांसी की सजा देते हुए बाल यौन शोषण अपराध को जज ने रेयरेस्ट ऑफ रेयर कहा था। पॉक्सो में दर्ज हजारों मामलों में लोगों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिल रही है। दिल्ली के 16600 स्कूलों और आंगनबाड़ी में बच्चों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाई जा रही है। वहीं दूसरी ओर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले इंस्टाग्राम, उसके विज्ञापनदाता और चाइल्ड पोर्नोग्राफी सम्बंधी वीडियो का प्रसार करने वाले संगठित अपराधियों के खिलाफ आपराधिक मामला तक दर्ज नहीं किया जा रहा है। इससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने के साथ कानून के शासन की भी बुनियाद कमजोर हो रही है। फेसबुक, वॉट्सएप और इंस्टाग्राम के 154 करोड़ ग्राहकों वाला भारत मेटा कंपनी के लिए सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में यौन शोषण के संगठित अपराध से बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाने वाली मेटा पर भारी जुर्माने के साथ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)
विराग गुप्ता का कॉलम:”डिजिटल इंडिया’ में बच्चों की सुरक्षा भी सरकार की जिम्मेदारी

