Site icon Socialblize

विदेश में चेतावनी, भारत में सिर्फ जानकारी… आखिर क्यों?

कंपनियों का दोहरा मापदंड लंबे समय से भारत में चर्चा का केंद्र है. दुनिया के करीब 20 देशों में पैकेट के सामने ही लाल और हरे निशान लगाते हैं, ताकि एक नजर में पता चल जाए की चीनी, नमक या फैट ज्यादा है. भारत में बहस 2017 से चल रही है. रंगीन चेतावनी जैसे प्रस्ताव भी सामने आए, लेकिन नियम वही है कि कंपनियां पैकेज के पीछे सामान्य जानकारी देती है. कंपनियों का तर्क सीधा है कि हर देश में लोगों का स्वाद अलग है और खर्च करने की क्षमता अलग है. इसलिए रेसिपी बदलनी पड़ती है. एक्सपर्ट मानते हैं कि रेसिपी में इतना फर्क कीमत और लोगों की जेब की वजह से सस्ता प्रोडक्ट बनाने के लिए कंपनियों को सस्ता कच्चा माल लेना पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट में पैकेज फूड पर चेतावनी वाले लेवल पर सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने कहा है कि दुनिया को पता चलना चाहिए कि भारत नागरिकों के स्वास्थ्य पर कितना गंभीर है. अदालत ने केंद्र सरकार और एफएसएसआई को इस मामले में अंतिम फैसला लेने को कहा है.

Exit mobile version