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मारुति सुजुकी का वैकल्पिक ईंधन पर बड़ा दांव:561 करोड़ रुपये के निवेश से बनाएगी कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट

मारुति सुजुकी ने वैकल्पिक ईंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 561 करोड़ रुपये के निवेश से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट लगाने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने शुक्रवार को चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कंपनी ने कहा है कि पहले चरण के अनुभव के आधार पर भविष्य में CBG निर्माण का विस्तार किया जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वाहन कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों के अलावा वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान दे रही हैं। CBG रासायनिक रूप से कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के समान है और इसे मौजूदा CNG वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार कच्चे तेल के आयात को कम करने, कृषि और नगरपालिका कचरे के प्रबंधन और उत्सर्जन को कम करने के लिए इसे बढ़ावा दे रही है। गुजरात प्रोजेक्ट की सफलता के बाद विस्तार यह निवेश मारुति सुजुकी के कंप्रेस्ड बायोगैस क्षेत्र में विस्तार को दर्शाता है। यह पहल पैरेंट कंपनी सुजुकी मोटर कॉर्प के गुजरात में चल रहे CBG प्रोजेक्ट की शुरुआती सफलता पर आधारित है। टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड जैसी अन्य वाहन कंपनियां भी CNG और LNG कमर्शियल वाहनों के पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं और वैकल्पिक ईंधन को अपनाने के लिए फ्यूल रिटेलर्स के साथ साझेदारी कर रही हैं। पहली तिमाही के नतीजे और उत्पादन कंपनी ने पहली तिमाही के नतीजों के साथ यह घोषणा की। मारुति सुजुकी ने बताया कि हरियाणा के खरखौदा में दूसरे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के शुरू होने से उत्पादन बढ़ा है। तिमाही के अंत में डीलर इन्वेंट्री करीब 13 दिन की रही। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनी ने 6,82,700 वाहन बेचे, जो पिछले साल की तुलना में 29.3 फीसदी अधिक है। इस दौरान छोटी कारों की घरेलू बिक्री में 34.1 फीसदी, SUV बिक्री में 44.6 फीसदी और निर्यात में 28.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। कंपनी की घरेलू बाजार हिस्सेदारी 2.3 फीसदी बढ़कर 41.2 फीसदी हो गई है। मुनाफे पर लागत का दबाव तिमाही के दौरान कंपनी की नेट सेल्स 36 फीसदी बढ़कर 49,959 करोड़ रुपये रही। हालांकि, नेट प्रॉफिट 11 फीसदी घटकर 3,352 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में 3,758 करोड़ रुपये था। मारुति सुजुकी ने बताया कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से मार्जिन पर असर पड़ा है। कंपनी के अनुसार, कच्चे माल की लागत तिमाही के दौरान बढ़ने लगी थी और युद्ध के कारण स्थिति और गंभीर हो गई, जिससे मजबूत राजस्व वृद्धि के बावजूद मुनाफे पर असर पड़ा। लागत के दबाव को कम करने के लिए कंपनी ने इस साल स्टील और अन्य जरूरी इनपुट की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते दो बार वाहनों के दाम बढ़ाए हैं।

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