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बोरिया मजुमदार का कॉलम:महिला क्रिकेट टीम को अब आगे की राह तलाशनी होगी

आईसीसी महिला टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल होने जा रहे हैं, लेकिन भारत अंतिम चार में नहीं है। प्रशंसकों के लिए यह निश्चित रूप से मायूस करने वाला होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि पिछले दो हफ्तों में हमारी टीम ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसके आधार पर वह वहां तक पहुंचने की हकदार नहीं थी। टीम एकजुट होकर नहीं खेल पाई। एक-दो उल्लेखनीय व्यक्तिगत प्रयास जरूर रहे, लेकिन टीम के रूप में प्रदर्शन दिखाई नहीं दिया। यही बात ऑस्ट्रेलिया व दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैचों में भारी पड़ी। अगर कप्तान हरमनप्रीत कौर से शुरुआत करें, तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने एक शानदार पारी खेली थी। वे अपने सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थीं और उनकी पारी के कारण ही भारत मुकाबले में बना हुआ था। लेकिन बाकी सभी मैचों में वे जरूरत से ज्यादा सतर्क नजर आईं। अगर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी ऐसी ही पारी खेली होती, तो भारत वह मैच जीत सकता था और सेमीफाइनल में पहुंच सकता था। यह निरंतरता की वही कमी है, जो टीम को नुकसान पहुंचा रही है। स्मृति मंधाना ने दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ महत्वपूर्ण मुकाबलों में अच्छी शुरुआत करने के बावजूद कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई। सच्चाई यह है कि यही दो मैच मायने रखते थे, क्योंकि बाकी मुकाबले अपेक्षाकृत कमजोर टीमों के खिलाफ थे। ऐसे में जब आपकी सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी ही बड़ा योगदान नहीं दे पाती, तो यह निश्चित रूप से एक समस्या है। जेमिमा रोड्रिगेज और यास्तिका भाटिया का तो पूरा टूर्नामेंट ही खराब रहा और जेमिमा को कुछ समय लेकर आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर समस्या कहां है। उनमें प्रतिभा है, लेकिन वे खुद भी यह स्वीकारेंगी कि उन्होंने अपने करियर में अभी तक क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया है। 2025 के विश्व कप सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगाए शतक जैसी पारियों को छोड़ दें, तो वे लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हैं। दीप्ति शर्मा ने पाकिस्तान के खिलाफ पांच विकेट लेने के बाद ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ा और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना 356वां विकेट हासिल करने के बावजूद उनका विश्व कप फीका ही रहा। ऋचा भी एक अच्छे मैच के बाद कुछ खास नहीं कर पाईं। गेंदबाजी में चारणी के अलावा कोई भी अन्य उस समय आगे नहीं आया, जब टीम को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। पूरे टूर्नामेंट में क्षेत्ररक्षण औसत से नीचे रहा और यहां तक कि सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल राधा यादव ने भी कई कैच छोड़े। अब आगे का रास्ता क्या है। अगला पड़ाव एशियन गेम्स हैं और एशियाई स्तर पर कोई बड़ी प्रतिस्पर्धा नहीं होने के कारण भारत आसानी से स्वर्ण पदक जीत सकता है। लेकिन जिस टूर्नामेंट पर ध्यान होना चाहिए, वह फरवरी 2027 में श्रीलंका में होने वाली चैम्पियंस ट्रॉफी है। क्या कोच अमोल मजुमदार कुछ कठोर फैसले ले सकते हैं और टीम को टी-20 के अनुरूप ढाल सकते हैं? 2024 और 2026 में ग्रुप चरण से बाहर होना अच्छा नहीं है और दो साल बाद ओलम्पिक को देखते हुए भारत को नए विचारों की जरूरत है।
अमोल के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण होंगे कि वे टीम को किस दिशा में ले जाते हैं। हालांकि चोटों ने टीम को प्रभावित किया, लेकिन आपको बैकअप खिलाड़ियों को तैयार रखना होता है और नए खिलाड़ियों को विकसित करना होता है। जब हमारे पास इतनी प्रतिभा और संसाधन हैं, तो स्वाभाविक है कि उम्मीदें भी ऊंची होंगी। अमोल को अपनी रणनीति पर भी विचार करना होगा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने जेमी को रिटायर आउट क्यों नहीं किया और ऋचा को पहले क्यों नहीं भेजा? नंबर 3 की स्थिति को लगातार क्यों बदला जाता रहा? हालांकि लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन इसका एकमात्र संभावित कारण हो सकता है, लेकिन क्या यह भी सच नहीं है कि नंबर 3 एक विशेष भूमिका है और किसी भी खिलाड़ी को उसमें जमने के लिए लंबा समय चाहिए? गेंदबाजी में प्रेमा रावत को 2 ओवर के बाद बाहर क्यों बैठाया गया? ऐसे कई सवालों के साथ हम विश्व कप को समाप्त कर रहे हैं और अब समय की सबसे बड़ी जरूरत यही होगी कि कुछ जवाब तलाशे जाएं और समाधान लागू किए जाएं। (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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