फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD आज भी निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद जरिया बना हुआ है। हालांकि, मेडिकल इमरजेंसी, एक्सीडेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर की मरम्मत जैसे अचानक आए खर्चों के समय लोगों के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि FD मैच्योर होने से पहले तोड़ना सही है या इसके बदले लोन लेना। पैसे की तुरंत जरूरत, तो क्या करें? किसी भी अचानक आई वित्तीय जरूरत के समय सही फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आपको पैसों की जरूरत कितनी जल्दी है, ब्याज या पेनल्टी का खर्च कितना आ रहा है, आपकी चुकाने की क्षमता कैसी है और यह जरूरत कितने समय (शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म) के लिए है। शॉर्ट टर्म जरूरतों के लिए FD पर लोन बेहतर बैंक आमतौर पर प्री-मैच्योर विड्रॉल पर 0.5% से 1% तक की पेनल्टी लगाते हैं। इसके अलावा, जितने समय तक FD बैंक के पास रही, उतने समय की ही दर से ब्याज मिलता है, जिससे कुल रिटर्न काफी घट जाता है। जैसे मान लीजिए कि आपने 1 लाख रुपए की FD 1 साल के लिए 6% की दर से की, लेकिन आप उसे 6 महीने बाद ही तोड़ देते हैं बैंक आपके पैसों पर 5% की दर से ब्याज देगा, ना कि 6% की दर से। इसके अलावा इस पर पेनाल्टी भी देनी होगी। FD की वैल्यू का 90% तक लोन ले सकते हैं FD की वैल्यू का 90% तक आप लोन ले सकते हैं। मान लीजिए आपकी FD की कीमत 1 लाख रुपए है तो आपको 90 हजार रुपए लोन मिल सकता है। अगर आप FD पर लोन लेते हैं तो आपको फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्याज से 1-2% ज्यादा ब्याज देना होगा। जैसे मान लीजिए की आपकी FD पर 4% ब्याज मिल रहा है तो आपको 5 से 6% ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। लोन न चुकाने पर क्या होगा? अगर कोई व्यक्ति FD पर लोन लेता है और उसे चुका नहीं पाता है, तो जब आपकी FD मैच्योर होगी तब बैंक लोन की बकाया राशि को इसमें से काट लेगा। ऐसे में इसके बाद FD का जो भी पैसा बचेगा वो आपको मिल जाएगा।
