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पेरेंटिंग- बेटा हर काम के लिए कहता है, “कल करूंगा”:डेडलाइन आ जाए तो हड़बड़ाने लगता है, उसे टाइम मैनेजमेंट कैसे सिखाएं?

सवाल- मैं जयपुर से हूं। मेरा 11 साल का बेटा हर काम आखिरी समय के लिए टाल देता है। स्कूल प्रोजेक्ट हो, होमवर्क हो या टेस्ट की तैयारी, तब तक शुरू नहीं करता, जब तक डेडलाइन सिर पर न आ जाए। फिर जल्दी-जल्दी काम पूरा करने की कोशिश में तनाव लेने लगता है। स्कूल से आकर मोबाइल देखता रहता है। ‘सिर्फ 10 मिनट’ कहकर एक घंटा बिता देता है। फिर होमवर्क करने के लिए पैनिक करता है। मैं उसे डांटना नहीं चाहती, बल्कि टाइम मैनेजमेंट सिखाना चाहती हूं। हम बच्चों को समय की अहमियत और अपने कामों को व्यवस्थित करना कैसे सिखा सकते हैं? एक्सपर्ट: रिद्धि दोषी पटेल, चाइल्ड एंड पेरेंटिंग साइकोलॉजिस्ट, मुंबई जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। 11-15 साल की उम्र में बच्चे धीरे-धीरे अपनी पढ़ाई, खेल, दोस्तों और दूसरी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना सीख रहे होते हैं। इसलिए इस उम्र में समय का सही इस्तेमाल करना हर बच्चे के लिए आसान नहीं होता। अगर आपका बेटा होमवर्क या दूसरे जरूरी काम बार-बार टाल देता है, तो इसे सिर्फ लापरवाही या आलस न समझें। इसके पीछे कई व्यवहारिक और मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं। अच्छी बात यह है कि सही मार्गदर्शन और कुछ छोटी-छोटी आदतों की मदद से बच्चे धीरे-धीरे बेहतर टाइम मैनेजमेंट सीख सकते हैं। टाइम मैनेजमेंट खराब होने के कारण इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हो सकते हैं- इसके पीछे कई और वजहें भी हो सकती हैं। ग्राफिक में देखिए- खराब टाइम मैनेजमेंट के संकेत छोटे बच्चों में कभी-कभार काम टालना या चीजें भूल जाना सामान्य है। लेकिन अगर यह बार-बार हो और इसकी वजह से पढ़ाई, होमवर्क या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो यह खराब टाइम मैनेजमेंट का संकेत है। इसके सभी संकेत ग्राफिक में देखिए- छोटी-छोटी आदतों से सिखाएं टाइम मैनेजमेंट इसका सबसे अच्छा तरीका रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों के जरिए बच्चे को समय की अहमियत समझाना है। इसमें माता-पिता का धैर्य और निरंतर सहयोग जरूरी है। बच्चे को टाइम मैनेजमेंट सिखाने के लिए कुछ बातों का खास ध्यान रखें- 1. साथ मिलकर रूटीन बनाएं 2. काम को छोटे हिस्सों में बांटना सिखाएं 3. प्रिऑरिटी सेट करना सिखाएं 4. स्क्रीन टाइम फिक्स करें 5. कैलेंडर और प्लानर का यूज सिखाएं 6. जिम्मेदारी लेना सिखाएं 7. खुद रोल मॉडल बनें ‘पहले काम, फिर मनोरंजन’ का रूल बच्चे को यह समझाना जरूरी है कि हर काम का एक क्रम होता है। अगर होमवर्क बाकी है और पहले टीवी देखने बैठ जाएंगे, तो स्ट्रेस बढ़ना स्वाभाविक है। इसके लिए आप घर में एक सरल नियम बना सकती हैं- ‘पहले काम, फिर मनोरंजन।’ इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे खेल या टीवी बिल्कुल न देखें। इसका मतलब यह है कि जरूरी काम पूरे करने के बाद बिना स्ट्रेस के उसका आनंद ले सकें। यह आदत जीवन के हर क्षेत्र में काम आती है। तारीफ से बढ़ता आत्मविश्वास ज्यादातर माता-पिता सिर्फ तब ध्यान देते हैं, जब बच्चा गलती करता है। लेकिन अच्छी आदतों को मजबूत बनाने के लिए पॉजिटिव रिस्पॉन्स बहुत जरूरी है। अगर बच्चा समय पर होमवर्क पूरा करे या अपना रूटीन फॉलो करे, तो उसकी तारीफ करें। जैसे- इस तरह की तारीफ से बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है। पेरेंट्स की कॉमन गलतियां कई बार माता-पिता जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जो बच्चे का तनाव बढ़ा देती हैं। इसलिए पेरेंट्स को इनसे बचना चाहिए, जैसेकि- प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी इन स्थितियों में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर से सलाह लेना बेहतर है- अंत में यही कहूंगी टाइम मैनेजमेंट बच्चों को एक दिन में नहीं सिखाया जा सकता। यह धीरे-धीरे विकसित होने वाला स्किल है। आपका बेटा अभी ऐसी उम्र में है, जहां सही मार्गदर्शन से वह समय की कीमत और अपनी जिम्मेदारियों को मैनेज करना सीख सकता है। याद रखिए, लक्ष्य उसे हर समय व्यस्त रखना नहीं, बल्कि यह सिखाना है कि वह अपने समय का संतुलित उपयोग कैसे करे। ……………………. पेरेंटिंग की ये खबर भी पढ़िए पेरेंटिंग- 10 साल का बेटा कोई काम खुद नहीं करता: चाहता है, सबकुछ कोई और करके दे, उसे घर के काम करना, जिम्मेदार होना कैसे सिखाएं? बच्चों को उम्र के अनुसार छोटी-छोटी जिम्मेदारियां देना बिल्कुल भी गलत नहीं है। लेकिन यहां एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘जिम्मेदारी सिखाने’ और ‘बच्चे से काम करवाने’ में एक बारीक अंतर है। पूरी खबर पढ़िए…

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