जिसकी आंख के आंसू सूख गए, वह भक्ति नहीं कर सकता। पिछले दिनों मुझे एक नेत्र रोग विशेषज्ञ मिले और उन्होंने कहा आंसू आंख की दवाई होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, आंखों में एक सूखापन आता है। जिंदगी के कुछ अनुभव आंख के आंसू भी सुखा देते हैं। इसलिए वृद्ध लोगों को नेत्रों के प्रति अत्यधिक सावधान रहना चाहिए। दो काम करें। एक तो जो काकभुशुंडि जी ने गरुड़ जी को बताया- निज प्रभु बदन निहारि निहारी, लोचन सुफल करउं उरगारी। गरुड़ जी, अपने प्रभु का मुख देख-देख कर मैं नेत्रों को सफल करता हूं। तो भगवान के दर्शन करते रहना चाहिए, उससे नेत्र सफल होते हैं। और दूसरी बात, समय रहते नेत्र चिकित्सक को दिखाते रहना चाहिए तो नेत्र स्वस्थ रहते हैं। प्रभु के दर्शन भी नेत्रों से दो तरीके से होते हैं- एक बाहर देखना, एक भीतर देखना। नेत्रों की यह विशेषता है कि यदि साध लिए जाएं तो हम अपने भीतर भी नेत्रों को देखने के लिए उपयोग कर सकते हैं। बाहर की दुनिया तो नेत्र दिखा ही देते हैं।
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:भगवान के दर्शन करते रहें, उससे नेत्र सफल होते हैं

