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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:यदि दिन में सपने देखना हैं तो पहले भाग्य और कर्म को समझें

इस बात की खूब चर्चा होती है कि हम अपने भविष्य के लिए सपने देखें। लेकिन अगर सपने देखना है तो पहले गहराई से सपनों को समझें। किस बात का सपना देख रहे हैं यह तो बाद की बात होगी। एक होती है डे-ड्रीमिंग, दिन में सपना देखना और दूसरा सपना रात को देखा जाता है। दिन का सपना एक योजना है, रात का सपना अनियोजित होता है। यदि दिन में सपने देखना हैं तो दो बातों को समझें- भाग्य और कर्म। फिर अपने सपने को हो रहे परिवर्तनों से जोड़ें। दुनिया तेजी से बदल रही है तो आपकी गति कहीं रिवर्स तो नहीं है? सपने पूरे करने हों तो दूसरों का सहयोग भरपूर लें, फायदा भी उठाएं। कौन-से काम हम सबसे अच्छे तरीके से कर सकते हैं, इसकी सूची बनाएं। और काम करते समय हमारी क्या कमजोरियां हैं, इस पर भी काम करें। क्योंकि आज अपना मकसद पूरा करने के लिए ‘हसलिंग’ का दौर है, यानी कड़ी मेहनत करना। अगर बातचीत की भाषा में कहें तो बिना उठापटक के, जुगाड़ के, आसानी से तो कुछ नहीं मिलता।

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