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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सावन को चाहे जैसे मनाएं, पर एक तप से भी गुजरें

हम सब सावन के महीने से गुजर रहे हैं। यह शिव-उपासना का बहुत ही पवित्र कालखंड है। शिव जी को जगतगुरु माना गया है। गुरु परमात्मा की वाणी को शब्द देता है। ईश्वर तक जाने के जो रास्ते हैं, उनमें से एक प्रमुख रास्ता गुरु का है। सावन का शिव जी से जो सबसे बड़ा संयोग है, वो यह है कि माता पार्वती ने इसी माह में शिव जी को प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। तो क्यों न हम सब सावन को चाहे जैसे मनाएं, पर एक तप से गुजरें। हमारे जीवन में ऊब और थकान आजकल बहुत जल्दी आ जाती है। ऊब का संबंध मन से है। थकान का संबंध शरीर से है। जब मन आशा छोड़ता है तो ऊब आ जाती है और इसका निराकरण है ध्यान, यानी मेडिटेशन किया जाए। ऐसे ही जब शरीर में ऊर्जा की कमी होती है तो थकान आती है, जिसे मिटाने का एक तरीका है कि समय पर विश्राम लिया जाए। सावन मास शृंगार, प्रेम की जीवंत अभिव्यक्ति करता है। तो क्यों न सावन मास में हम वर्ष भर की इतनी ऊर्जा अपने भीतर लाएं कि ऊब और थकान हमें परेशान न करें।

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