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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:दूसरों का फायदा उठाने में माहिर लोगों से बचना जरूरी है

पिछले दिनों जेन-जी ने ऐसा युद्ध लड़ा, जिसमें कई परिभाषाएं बदल गईं। अविश्वसनीय, अकल्पनीय साकार हो गया। झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए- इस कहावत में दुनिया शब्द को समझना होगा। दुनिया बड़े अजीब ढंग से बनी है। कभी-कभी लगता है झुक गई पर सीधे खड़ी रहती है। और कभी लगता है सीधे खड़ी है तो झुकी लगती है। 17वीं शताब्दी में अमेरिका के गृहयुद्ध में एक शब्द चला था- वोक। जेन-जी को इस शब्द से बचना पड़ेगा। इस शब्द का अर्थ है ऐसी विचारधारा के लोग, जो दूसरों का फायदा उठाते हैं। ये आक्रामक होते हैं, चिड़चिड़े होते हैं, सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेते हैं और यह किसी भी आंदोलन या व्यवस्था में घुस जाते हैं। श्रेय हड़पने में ये बड़े माहिर होते हैं। ये अकसर अभिजात पार्टी में, कुलीन क्लबों में, कैंडल-लाइट मार्च में, आर्ट क्लबों में पाए जाते हैं। अच्छी-खासी व्यवस्था में यह अपना ‘वोकिस्तान’ बना लेते हैं। रावण ने श्रीराम से युद्ध करते समय वोक शैली का ही प्रयोग किया था।

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